देवदासी प्रथा हमारे इतिहास का और संस्कृति का एक पुराना और काला अध्याय है, जिसका आज के समय में कोई औचित्य नहीं है । इस प्रथा के खात्मे से कहीं ज्यादा उन बच्चियों के भविष्य की नींव का मजबूत होना बहुत आवश्यक है। देवदासी प्रथा कहते ही आपके मन में ये बात आती होगी कि वो महिलाएं जो धर्म के नाम पर दान कर दी जातीं हैं और फिर उनका जीवन धर्म और शारीरिक शोषण के बीच जूझता रहा।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये घिनौनी प्रथा आज भी जारी है। आज भी आंध्र प्रदेश में, विशेषकर तेलंगाना, कर्नाटका और महाराष्ट्र में दलित महिलाओं को देवदासी बनाने या देवी देवताओं के नाम पर मंदिरों में छोड़े जाने की रस्म चल रही है। “देवदासी बनी महिलाओं को इस बात का भी अधिकार नहीं रह जाता कि वो किसी की हवस का शिकार होने से इनकार कर सकें”। जिस शारीरिक शोषण के शिकार होने के सिर्फ जिक्र भर से रुह कांप जाती हैं।
अभी हाल में कर्नाटक के रायचूर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है। चिंचोडी गांव में रहने वाली मनीषा (काल्पनिक नाम) के माता पिता भी उसे बहन के पति से शादी न कनरे पर देवदासी प्रथा की धमकी दे रहे थे। जहां देवदासी प्रथा के डर से 20 साल की लड़की अपना घर छोड़कर ही भाग गई। दरअसल लड़की के माता पिता ने उसे अपनी बहन के पति के साथ शादी रचाने को कहा था।
लड़की को ये बात पसंद नहीं आई। उसने शादी का विरोध किया। हालांकि घरवाले उसे शादी करने के लिए फोर्स करने लगे। उन्होंने उसे धमकी दी कि या तो वह अपनी बहन के पति से शादी कर ले या जिंदगीभर देवदासी प्रथा का पालन करे।
इस प्रथा के डर से लड़की अपने घर से भागकर रक रिश्तेदार के यहां चली गई। लेकिन गुस्से से भरे माता पिता ने उस रिश्तेदार को भी धमकी देना शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने महिला एवं बाल कल्याण कार्यालय की मदद ली।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग के हस्तक्षेप के बाद मनीषा बच गई। उसे देवदुर्गा इलाके में आदिजंबावा एजुकेशन सोसाइटी के महिला पुनर्वास केंद्र भेज दिया गया। इस घटना के बाद लड़की ने अपने माता पिता के खिलाफ शिकायत लिखवाई।
अब हैरत की बात ये रही कि माता पिता ने भी अपनी बेटी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी। अपनी शिकायत में उन्होंने बेटी के ऊपर आरोप लगाया कि वह अपनी पसंद के लड़के के साथ शादी करना चाहती है और इसके लिए घर से पैसे लेकर भागने का प्लान बना रही है। माता पिता ने अनुरोध किया कि उनकी बेटी की कस्टडी उन्हें वापस सौंप दी जाए। हालांकि बेटी ने माता पिता के साथ रहने से इनकार कर दिया।
उधर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हम लड़की की काउंसलिंग करेंगे। यदि आवश्यकता हुई तो स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता भी देंगे। यदि लड़की की इच्छा अपनी पसंद के लड़के से शादी करने की है तो यह विवाह भी करवाया जाएगा।
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