ध्यान, योग और प्रार्थना पर विश्वास रखने वाले जीते हैं 4 साल ज्यादा

लंदन. अमेरिका में एक दिलचस्प अध्ययन हुआ। जिसमें पाया गया है कि भगवान पर विश्वास रखने (आस्तिक) वाले नास्तिकों की अपेक्षा चार साल ज्यादा जीते हैं। अध्ययनकर्ताओं ने अमेरिका के विभिन्न राज्यों के अखबारों में छपे करीब 1,000 मृत्युलेखों का अध्ययन किया। उनका मानना है कि इस परिणाम का एक कारण आस्तिकों का सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहना हो सकता है। लेकिन उन्होंने पाया कि इस वजह से अधिकतम 1 वर्ष ज्यादा जीवनकाल के प्रमाण मिलते हैं।
ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए अध्ययन के सह-लेखक डॉ बाल्डविन वे का कहना है कि, हो सकता है नास्तिकों को यह बात बकवास लगने लगे। लेकिन इसके पीछे एक संबंध है, जिसे वह झुठला नहीं सकते।

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अध्ययन में अगस्त 2010 से अगस्त 2011 के मध्य अमेरिका के 42 बड़े शहरों के अखबारों में छपे 1,096 मृत्युलेखों का अध्ययन किया गया। जिसमें मृत व्यक्ति के आस्तिक या नास्तिक होने की बात कही गई। पहले इसमें पाया गया कि नास्तिकों की अपेक्षा आस्तिक का जीवनकाल 5.64 वर्ष ज्यादा है। लेकिन जब मृत लोगों की लिंग और वैवाहिक स्थिति पर भी विचार किया गया तो यह अंतर घटकर 3.82 (करीब 4 साल) ज्यादा दिखा।

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डॉ वे के अनुसार जीवनकाल के इस अंतर का एक बड़ा कारण धार्मिक लोगों की जीवनशैली के नियम व मानदंड हो सकते हैं। जो कि उन्हें अस्वस्थ खानपान और गतिविधियों के लिए मना करते हैं। उनके अनुसार धार्मिक लोग धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करते हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य दूसरों के मुकाबले बेहतर रहता है। इसके साथ ही उनके द्वारा किया गया ध्यान, योग और प्रार्थना तनाव व अवसाद को दूर करने में मदद करता है। जिससे वह मानसिक तौर पर ज्यादा मजबूत रहते हैं।

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