वाराणसी में 10 साल से बंद पड़ा शिव मंदिर: क्या है पूरा मामला?
क्या आप जानते हैं कि वाराणसी के एक मुस्लिम बहुल इलाके में 10 साल से एक शिव मंदिर बंद पड़ा है? जी हाँ, आपने सही सुना! यह मामला अभी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोगों में इसको लेकर काफी उत्सुकता है। आइये जानते हैं इस पूरे मामले के बारे में विस्तार से।
मदनपुरा का रहस्यमयी मंदिर
यह मंदिर वाराणसी के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के मदनपुरा में स्थित है। बताया जा रहा है कि यह मंदिर लगभग ढाई सौ साल पुराना है, और मकान नंबर D-31 के चबूतरे के पास स्थित है। पिछले एक दशक से इस मंदिर पर ताला लगा हुआ है, जिससे यह बंद है। मंदिर के अंदर मिट्टी भरी होने का भी दावा किया जा रहा है।
सनातन रक्षक दल ने की पुलिस से शिकायत
सोशल मीडिया पर बंद पड़े मंदिर की तस्वीरें वायरल होने के बाद, सनातन रक्षक दल ने पुलिस को एक पत्र लिखकर मंदिर को फिर से खुलवाने की मांग की है। इस पत्र में कहा गया है कि मंदिर को खोलकर वहां पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए। पुलिस प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और मौके पर जांच की है।
पुलिस ने की जांच, बल तैनात
पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल की। जांच के बाद, पुलिस ने इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस अब मंदिर के मालिकाना हक का पता लगाने की कोशिश कर रही है। यह पता लगाना भी ज़रूरी है कि आखिर ये ताला किसने और कब लगाया था।
क्या है मंदिर का इतिहास?
कहा जा रहा है कि इस मंदिर का जिक्र काशी खंड में है। यह मंदिर पुष्पदंतेश्वर से दक्षिण परम सिद्धिप्रद सिद्धिश्वर का है, जिसके पास ही सिद्धतीर्थ कूप भी है। लेकिन इस दावे की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। इस मामले में ऐतिहासिक तथ्यों का पता लगाना महत्वपूर्ण है।
आगे क्या होगा?
यह मामला अभी भी जारी है और पुलिस जांच कर रही है। मंदिर का मालिकाना हक पता चलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में क्या निर्णय आता है। क्या मंदिर फिर से खुल पाएगा? क्या पुराने भक्त फिर से यहां पूजा-अर्चना कर पाएंगे? समय ही बताएगा।
Take Away Points
- वाराणसी में 10 साल से बंद पड़ा एक शिव मंदिर का मामला सुर्खियों में है।
- सनातन रक्षक दल ने पुलिस को पत्र लिखकर मंदिर खुलवाने की मांग की है।
- पुलिस ने मौके पर जांच की है और इलाके में पुलिस बल तैनात किया है।
- मंदिर के मालिकाना हक और ताला लगाने वाले व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश जारी है।
- इस मामले का ऐतिहासिक पहलू भी जांच का विषय है।

Leave a Reply