UP : हर ब्लॉक में रखे जाएंगे लोक कल्याण मित्र, वेतन मिलेगा 25 हजार

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लखनऊ। यूपी सरकार ने सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने और पात्र लोगों की मदद करने के लिए हर ब्लॉक पर एक लोक कल्याण मित्र तैनात करने का फैसला किया है। 822 ब्लॉकों पर इनकी तैनाती की जाएगी। इन्हें 25 हजार मासिक वेतन व 5000 रुपये तक का यात्रा भत्ता भी दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लोक कल्याण मित्रों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए यह फैसला किया गया है।

एक साल के इन्टर्नशिप कार्यक्रम के तहत लोक कल्याण मित्र तैनात होंगे। चयन में शासकीय नियमों के अनुसार आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। हर तीन महीने पर उनके काम की समीक्षा होगी। एक साल बाद सीएम के अनुमोदन से उनकी तैनाती एक साल और बढ़ सकेगी। एक मित्र के जिम्मे उस ब्लॉक के सभी गांव होंगे। प्रदेश स्तर पर केवल दो लोक कल्याण मित्र मुख्यालय पर तैनात होंगे। चयन के बाद उनकी ट्रेनिंग टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, गिरि इंस्टिट्यूट और कुछ प्रबन्धन संस्थाओं में करवाई जाएगी।

योग्यता व चयन
– कला, वाणिज्य, विज्ञान, इंजिनियरिंग या किसी भी विषय में स्नातक व दो साल का काम का अनुभव होना जरूरी।
– 21 से 40 साल तक की आयु वर्ग के अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे।
– जिलों में डीएम की अध्यक्षता में बनी कमिटी चयन करेगी। इसमें सीडीओ और जिले का सूचना अधिकारी शामिल रहेंगे।
– मुख्यालय (लखनऊ) पर तैनात होने वाले दो लोक कल्याण मित्रों की तैनाती मंडलायुक्त, लखनऊ करेंगे।
– कम्प्यूटर में एमएस ऑफिस की जानकारी रखने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी।

फीस वसूली पर लगाम के लिए अब डीएम की कमिटी
निजी स्कूलों में मनमानी फीस लिए जाने पर लगाम कसने के लिए विधानसभा के मॉनसून सत्र में विधेयक आएगा। सरकार अप्रैल में ही यूपी स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का विनियमन) कानून अध्यादेश ला चुकी है। सदन शुरू होने पर छह सप्ताह के भीतर अध्यादेश निष्प्रभावी हो जाता है। इसलिए विधेयक लाकर इन नियमों को पूरी तरह से कानूनी जामा पहना दिया जाएगा। विधेयक में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अब मंडल स्तरीय शुल्क नियामक समिति की जगह जिला स्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव है। इसका अध्यक्ष डीएम होगा। समिति के बाकी सदस्यों का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा।

केजीएमयू में फिर नियुक्त होगा प्रति कुलपति
कैबिनेट ने केजीएमयू एक्ट 2002 में संशोधन पर मुहर लगा दी है। इसके तहत विश्वविद्यालय में प्रति कुलपति का पद पुनरू सृजित कर दिया गया है। इससे कुलपति का बोझ हल्का होगा। 2004 में यह पद खत्म कर दिया गया था। इसके साथ ही एसजीपीजीआई और एम्स की तर्ज पर केजीएमयू के हर विभाग में अडिशनल प्रफेसर का पद सृजित करने का प्रस्ताव भी मंजूर हो गया है। केजीएमयू में दो नई फैकल्टी-पैरामेडिकल और नर्सिंग, खोलने का प्रस्ताव भी पास हो गया है। इनके अब तक विश्वविद्यालय में इंस्टिट्यूट थे। इसके लिए केजीएमयू ऐक्ट-2002 में संशोधन का विधेयक इसी मॉनसून सत्र में रखा जाएगा।

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