UP : रहस्यमय बुखार की दहशत, अब तक 703 लोगों की हुई मौत, Read Full Story !

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लखनऊ. बरेली मंडल के दो जिलों बरेली व बदायूं से चला यह बुखार अब पीलीभीत और शाहजहांपुर के साथ बरेली मंडल के चारों जिलों को अपनी चपेट में ले चुका है. बुखार की दहशत देवीपाटन मंडल के बाद अब लखनऊ मंडल तक भी पहुंच गई है.रहस्यमय बुखार से लोग तेजी से मर रहे हैं लेकिन, पूरी ताकत झोंकने के बाद भी प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग इसकी असल वजह तक नहीं पहुंच पाया है.

तीन हफ्तों में तीनों मंडलों में करीब डेढ़ लाख लोग इस बुखार की चपेट में आए हैं. इसमें से अब तक 703 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि सरकारी आंकड़ा अभी बुखार से 79 मौतों का ही है. बुखार और मौतों के लिए मलेरिया, टाइफाइड और वायरल फीवर को जिम्मेदार ठहरा रहे स्वास्थ्य अधिकारी बदायूं में डेंगू का एक मरीज और देवीपाटन मंडल के बहराइच जिले में इंसेफ्लाइटिस के पांच मरीज मिलने और उनमें से तीन की मौत होने से हैरत में हैं, जबकि लखनऊ मंडल के हरदोई, सीतापुर और लखीमपुर खीरी में भी मौत के मुंह में ले जाने वाले इस बुखार के पहुंचने से लोग जबरदस्त दहशत में घिर गए हैं.

स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि जब पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का स्तर कमोबेश एक सा है, बारिश के बाद गंदगी, जलभराव व मच्छरों के हालात समान हैं और अस्पतालों की दशा भी एक जैसी है तो केवल बरेली के 147 और बदायूं के 164 गांवों में ही जानलेवा बुखार का प्रकोप क्यों हुआ.

अधिकारी यह भी बताने की स्थिति में नहीं हैं कि मामूली इलाज से ठीक हो जाने वाला मलेरिया या टाइफाइड अचानक इतने बड़े पैमाने पर जानलेवा कैसे बन गया. स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.पद्माकर सिंह से लेकर राज्य मुख्यालय की संचारी रोग निदेशक डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी तक यह जवाब पाने की कोशिश में हैं लेकिन, अभी उनके हाथ खाली हैं और लोग जान गंवा रहे हैं.

स्वास्थ्य अधिकारी भले ही अचानक बड़े पैमाने पर जानलेवा बुखार फैलने का कारण न समझ पा रहे हों लेकिन, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी का मानना है कि यह समस्या मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) की लापरवाही से खड़ी हुई है. त्रिवेदी का कहना है कि जिन जिलों में सीएमओ सक्रिय हैं, वहां बुखार नियंत्रित है लेकिन, जहां सीएमओ न ध्यान नहीं दिया, वहां बुखार बढ़ गया.

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