नई दिल्ली। उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के मरने से पहले अपने भाई से कहा था कि मैं जीना चाहती हूं और यह भी कहा था कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। इसके बाद पूरे देश में रोष व्याप्त हो गया है। आपको बताते जाए कि शुक्रवार रात सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया। पांच दरिंदों ने गुरुवार सुबह पीड़िता पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। इसमें गैंगरेप का मुख्य आरोपी भी शामिल था। वह जमानत पर बाहर ही आया था। उसने बाहर आकर इस घटना को अंजाम दिया। पीड़िता एक किलोमीटर पैदल चलकर पुलिस को फोन पर इस घटना की जानकारी दी थी।
पीडिता की ख्वाहिश थी कि वह अपने गुनहगारों को फांसी के फंदे तक पहुंचते देखना चाहती थी। उसकी ख्वाहिश अधूरी रह गई। उन्नाव की बेटी इन्हीं आखिरी अल्फाज के साथ हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो गई। 24 घंटे तक मौत से जूझते-जूझते उसकी सांसें बोझिल हो गई थीं। आखिरकार शुक्रवार रात 11 बजकर 40 मिनट पर इंसाफ की अधूरी चाहत के साथ ही वह दुनिया छोड़ गई।
वहीं पीडिता के पिता ने कहा है कि दोषियों को फांसी दी जाए और दौड़ा-दौड़ाकर मारा जाए। उन्नाव रेप पीड़िता को जलाए जाने के मामले की जांच एसआईटी कर रही है। लखनऊ के मंडलायुक्त मुकेश मेश्राम ने बताया कि इस एसआईटी का नेतृत्व एएसपी स्तर के एक अधिकारी करेंगे। आपको बताते जाए कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़िता का इलाज सरकारी खर्चे पर कराने का ऐलान किया था। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे उसे नाजुक हालत में लखनऊ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
Leave a Reply