स्वामी प्रसाद मौर्य का विवादित बयान: क्या हर मस्जिद के नीचे है मंदिर?
क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक ऐसा विवादित बयान दिया है जिससे देश भर में तूफ़ान सा आ गया है? उन्होंने दावा किया है कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर है और अगर यही चलता रहा तो हर मंदिर में बौद्ध मठ ढूंढना शुरू कर देंगे! यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में भी खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। आइए, इस विवादित बयान के पीछे की सच्चाई और इसके संभावित परिणामों को जानते हैं।
मंदिर-मस्जिद विवाद: एक पुरानी कहानी
भारत में मंदिर-मस्जिद विवाद कोई नई बात नहीं है। सदियों से चले आ रहे यह विवाद कई बार सांप्रदायिक दंगे का कारण बन चुके हैं। अयोध्या विवाद इसका सबसे ताजा उदाहरण है। लेकिन, स्वामी प्रसाद मौर्य का यह बयान एक नए विवाद को जन्म दे सकता है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया आगे चलकर बहुत महंगी साबित होगी और साम्प्रदायिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाएगी। क्या सच में हर मंदिर और मस्जिद के नीचे पुराने अवशेष दबे हुए हैं?
मौर्य का सरकार पर हमला
स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी सरकार पर भी जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी जानबूझकर हिंदू-मुस्लिम का एजेंडा उठाती है और माहौल खराब करती है। उन्होंने मदरसों में आतंकवादी खोजना और मस्जिद में मंदिर ढूंढना गलत बताया है। क्या बीजेपी की राजनीति सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा है? क्या यह मौर्य का एक राजनैतिक दांव है?
क्या हर मंदिर में बौद्ध मठ?
मौर्य ने आगे कहा कि अगर यही परिपाटी जारी रही, तो हम हर मंदिर में बौद्ध मठ ढूंढना शुरू कर देंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ धाम आदि पहले बौद्ध मठ थे। क्या इतिहास के पन्नों को पलटने से सच्चाई सामने आएगी? क्या यह केवल एक राजनीतिक बयान है या इसमें कोई सच्चाई भी है?
बसपा और सपा पर मौर्य का कटाक्ष
बसपा में जाने के सवाल पर मौर्य ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी बाबा साहब के मिशन से हट गई है, इसलिए वे वहां नहीं जाएंगे। समाजवादी पार्टी पर भी उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सपा डर के काम करती है और विपक्ष की भूमिका निभा पाने में असमर्थ है। क्या यह केवल एक राजनीतिक बयान है या मौर्य को अन्य पार्टियों से कोई निराशा है?
Take Away Points
- स्वामी प्रसाद मौर्य का बयान देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला है।
- मंदिर-मस्जिद विवाद एक पुरानी और संवेदनशील समस्या है।
- बीजेपी पर मौर्य का आरोप गंभीर है और इस पर गौर करने की जरूरत है।
- इतिहास की तह में झाँकने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।
- राजनीतिक दलों को सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए।

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