लखनऊ । चतुर्थ श्रेणी के 3833 पदों को भरने में निगम द्वारा तहसील व कलेक्ट्रेट में टेंडर के नियमों का उल्लंघन कर इच्छुक अभ्यर्थियों से धन उगाही करके नियुक्ति पत्र जारी करने की शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार को जांच सौंपी थी। 30 अप्रैल को सेवानिवृत होने से पहले प्रभात कुमार ने शासन को जांच रिपोर्ट दे दी।
एपीसी की जांच में भर्ती घोटाले का खुलासा होने पर मुुख्यमंत्री ने दोषी अफसरों व संस्थाओं के के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैैं। अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने गुरुवार देर शाम बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा लिए निर्णय के अनुसार दोषी अफसरों व संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई के आदेश-निर्देश संबंधित विभागों को दे दिए गए हैैं। जांच में खुलासा हुआ है कि सेवा प्रदाता संस्थाओं ने नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से दो-दो लाख रुपये तक लिए हैैं। संस्थाओं द्वारा लाखों रुपये वसूलने की शपथ पत्र के जरिए एपीसी को शिकायतें मिली हैैं।
मसलन, नाइस बिल्डर्स एंड कान्ट्रेक्टर्स पर बुलंदशहर के गुलवीर सिंह ने एक लाख रुपये, रामपुर के राजेश कुमार ने 1.10 लाख, सिल्कऑन हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड पर गोण्डा के सूर्यमनी ने 90 हजार, आरएमएस पर बरेली की राजदेवी ने एक लाख रुपये और एवीएसएम सिक्योरिटी एंड आउट सोर्सिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर फैजाबाद के अमित कुमार ने दो लाख रुपये लेने की शिकायत की है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि औसतन प्रति अभ्यर्थी एक लाख रुपये की अवैध उगाही कर करोड़ों रुपये की बंदरबांट राजस्व परिषद, लघु उद्योग निगम और संस्थाओं के बीच किए जाने की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है। तहसीलों और कलेक्ट्रेट में तकरीबन चार हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के भर्ती घोटाले में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है।
भर्ती घोटाले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम (यूपीएसआइसी) के तत्कालीन आइएएस प्रबंध निदेशक केदार नाथ सिंह सहित निगम और राजस्व परिषद के पांच अफसरों को निलंबित किया गया है। दोषी अफसरों और संबंधित संस्थाओं को ब्लैक लिस्ट कर उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने और सतर्कता जांच के भी निर्देश दिए गए हैैं। साथ ही नियम विरुद्ध नियुक्त किए गए सभी संविदाकर्मियों की बर्खास्तगी के भी आदेश दिए गए हैैं। प्रबंध निदेशक केदार नाथ सिंह भर्ती के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए लघु उद्योग निगम के तत्कालीन को निलंबित किया गया है।
वर्ष 2012 बैच के आइएएस सिंह वर्तमान में पर्यटन विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैैं। इनके साथ ही राजस्व परिषद के उप भूमि व्यवस्था आयुक्त सुनील कुमार चैधरी, वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी प्रदीप कुमार, उप प्रबंधक लेखा केएन अवस्थी तथा प्रबंधक मैनपावर राजीव त्रिपाठी को भी निलंबित किया गया है। सभी अफसरों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही के साथ-साथ भर्ती के लिए दोषी सभी छह सेवा प्रदाता संस्थाओं के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आइपीसी की सुसंगत धाराओं में एफआइआर दर्ज कराने के आदेश राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव को दिए गए हैैं।
परिषद को तत्काल प्रभाव से सभी संस्थाएं ब्लैैक लिस्ट कर उनकी सिक्योरिटी धनराशि भी जब्त करने के निर्देश दिए गए हैैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग से भर्तियों में गड़बड़ी के लिए लघु उद्योग निगम में कार्यरत अन्य अफसरों का पता लगाने के मद्देनजर उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैैं। राजस्व परिषद को यह निर्देश भी दिए गए हैैं कि लघु उद्योग निगम में 12 जनवरी को इम्पैनलमेंट की अवधि समाप्त होने के बाद संबधित संस्थाओं द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में नियम विरुद्ध नियुक्त किए गए लगभग चार हजार चतुर्थ श्रेणी संविदाकर्मियों की 12 जनवरी से ही संविदा समाप्त कर उनसे आगे कार्य भी न लिया जाए। गौरतलब है कि जांच शुरू करते ही एपीसी ने परिषद को ज्वाइनिंग पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। ऐसे में ज्यादातर संविदाकर्मियों की जिलों में ज्वाइनिंग नहीं हो सकी थी।
लघु उद्योग निगम व राजस्व परिषद के निलंबित अफसर
केदार नाथ सिंह, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, उप्र लघु उद्योग निगम
सुनील कुमार चैधरी, उप भूमि व्यवस्था आयुक्त, राजस्व परिषद
प्रदीप कुमार, वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी
केएन अवस्थी, उप प्रबंधक लेखा
राजीव त्रिपाठी, प्रबंधक मैनपावर
ब्लैक लिस्ट की गईं दोषी संस्थाएं
मेसर्स आरएमएस टेक्नोसॉल्यूशन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड
मेसर्स एवीएसएम सिक्योरिटी एंड आउट सोर्सिंग प्राइवेट लिमिटेड
मेसर्स नाईस बिल्डर्स एंड कान्ट्रेक्टर्स
मेसर्स केवल ई साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड
मेसर्स राज इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड
मेसर्स सिलकान हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड
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