संभल हिंसा: क्या वाकई मस्जिद थी प्राचीन मंदिर? जानिए सच्चाई
क्या आप जानते हैं उत्तर प्रदेश के संभल में एक ऐसी मस्जिद है जिसके इतिहास पर सवाल उठ रहे हैं? क्या यह मस्जिद असल में एक प्राचीन हिंदू मंदिर थी, जिसे बाद में तोड़कर बनाया गया था? हाल ही में हुए सर्वे और उसके बाद हुई हिंसा ने इस सवाल को और भी गहरा बना दिया है। इस लेख में हम आपको इस विवादित मस्जिद के इतिहास से जुड़ी हर बात बताएँगे, ताकि आप खुद तय कर सकें कि सच्चाई क्या है।
संभल जामा मस्जिद विवाद: एक झलक
संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमे चार लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर आई। इस घटना ने पूरे देश में सदमा पहुँचाया है, और लोगों में उत्सुकता है की आखिरकार यह सब क्यों और कैसे हुआ। कई राजनितिक दल भी इस विवाद में अपनी भूमिका निभा रहे हैं और सब लोग एक-दूसरे पर दोषारोपण में लगे है।
जामा मस्जिद सर्वे: क्या था विवाद का कारण?
यह विवाद एक याचिका से शुरू हुआ था जिसमे दावा किया गया था कि जामा मस्जिद पहले हरिहर मंदिर हुआ करती थी। अदालत ने याचिका के बाद मस्जिद का सर्वे का आदेश दिया। पहले सर्वे के दौरान तो कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ, पर 24 नवंबर को दुबारा सर्वे करने पर हिंसा भड़क गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को आंसू गैस छोड़नी पड़ी और लाठीचार्ज करना पड़ा।
क्या थी सर्वे टीम की रिपोर्ट?
सर्वे टीम ने अपना काम पूरा कर लिया है और 29 नवंबर को अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश की गई है। रिपोर्ट में मस्जिद के निर्माण और उसके इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ शामिल हैं, जिन पर अब आगे अदालत में सुनवाई होगी और सभी पक्ष अपनी अपनी बात रखेंगे। रिपोर्ट में क्या हैं, वो अभी सामने नहीं आया है, पर यह निश्चित रूप से इस पूरे विवाद को आगे सुलझाने में अहम भूमिका निभाएगी।
1875 की ASI रिपोर्ट: क्या कहती है?
इस मामले में एक पुरानी ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की रिपोर्ट काफी चर्चा में है, जो 1875 की है। यह रिपोर्ट ए.सी.एल. कार्लाइल द्वारा लिखी गई थी और इसमें जामा मस्जिद के बारे में काफी विस्तार से बताया गया है। रिपोर्ट में कुछ ऐसे निष्कर्ष निकाले गए हैं जिससे ये पता चलता है की मस्जिद के कुछ हिस्सों का संबंध प्राचीन मंदिरों से हो सकता है। इसमें बताया गया है कि मस्जिद के कुछ खंभे और ढाँचे, हिंदू मंदिरों की वास्तुकला के समान दिखते हैं और इसे बाद में प्लास्टर से छुपाया गया होगा। हालाँकि ये दावा अभी पुष्ट नहीं हुए हैं, और रिपोर्ट अदालत में भी पेश की जा चुकी हैं, तो अब यह देखा जाना हैं की आगे क्या निर्णय आता है।
बाबरनामा में भी क्या लिखा है?
हिंदू पक्ष ने बाबरनामा में भी कई तरह के साक्ष्य खोजे हैं जो इस बात का समर्थन करते हैं की मस्जिद को तोड़कर बनाया गया होगा। बाबरनामा में इस बारे में बताया गया है की बाबर के दरबारी ने एक मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनायी होगी। यह सब कितना सच है यह तो अदालत ही तय करेगी, पर यह बात तय है कि इस घटना ने पूरे इतिहास को खंगालने की आवश्यकता को दिखाया है।
सियासी आरोप और प्रति-आरोप
संभल में हुई हिंसा के बाद कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ ने सरकार को जिम्मेदार ठहराया, तो कुछ ने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाए। यह घटना कई राजनीतिक दलों के बीच एक नए विवाद का विषय बन गया है, और सभी पार्टियां इस मुद्दे का अपने अपने तरह से राजनैतिक फायदा उठाने में लगी हुईं हैं।
आगे क्या होगा?
अब यह देखना है कि अदालत आगे क्या फैसला सुनाती है और आगे इस विवाद का क्या हल निकलता है। इस पूरे मामले से सबक यही निकलता है कि ऐसी संवेदनशील घटनाओं को निपटाने के लिए शांतिपूर्ण और संवेदनशील तरीके अपनाने बेहद जरुरी हैं। आशा है की इस मामले में सभी को न्याय मिलेगा और आगे ऐसी कोई घटना नहीं होगी।
Take Away Points
- संभल की जामा मस्जिद को लेकर एक लंबा विवाद चल रहा है।
- मस्जिद के सर्वे के बाद हुई हिंसा ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
- 1875 की ASI रिपोर्ट और बाबरनामा में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिससे पता चलता है की मस्जिद पहले हिंदू मंदिर थी।
- इस विवाद से जुड़ी सभी बातें अभी अदालत में हैं, जहाँ अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।
- इस घटना से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर पड़ता है।

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