एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो की ट्रेनिंग: एक मंत्री की कहानी

एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो की ट्रेनिंग: एक मंत्री की दिलचस्प दास्तां!

क्या आप जानते हैं कि एक भारतीय मंत्री ने एनएसजी के खतरनाक ब्लैक कैट कमांडो कोर्स में ट्रेनिंग ली थी? उत्तर प्रदेश के मंत्री और पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण ने हाल ही में अपनी रोमांचक ट्रेनिंग के किस्से सुनाकर सबको हैरान कर दिया है. उन्होंने 2003-04 में दिल्ली में ली गई इस कठिन ट्रेनिंग के बारे में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने बताया कि ये कोर्स इतना कठिन था कि एडमिशन फॉर्म में ही मौत के बाद के अंतिम संस्कार का विकल्प भरना पड़ता था! आइये, जानते हैं असीम अरुण के रोमांचक अनुभवों के बारे में विस्तार से…

एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो की कठिन ट्रेनिंग

असीम अरुण ने बताया कि वह यूपी पुलिस के 33 जवानों के साथ इस कोर्स में शामिल हुए थे. सभी पीएसी के कॉन्स्टेबल थे, और असीम अरुण अकेले आईपीएस अधिकारी. उन्हें खास शर्तों पर ट्रेनिंग में शामिल किया गया था- बिना किसी विशेष सुविधा या रियायत के. उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग इतनी कठिन थी कि 5-7 मिनट के रेस्ट के समय में भी लाइन में लगकर चाय-बिस्कुट लेना होता था.

सहपाठियों का प्यार और समर्थन

कुछ दिनों बाद असीम अरुण के सहपाठियों ने उन्हें लाइन में लगने से मना किया. उन्हें अरुण के लिए रियायत करना बेहद जरूरी लग रहा था. अरुण ने बताया कि वे ऐसे सहपाठियों के ऋणी हैं जिनके मिट्टी से सने हाथों में चाय का कप उन्हें आज भी याद आता है. ये क्षण बताते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी साथियों का प्यार और समर्थन कितना महत्वपूर्ण होता है।

आईपीएस से राजनीति तक का सफर

असीम अरुण ने आईपीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा. उन्होंने कानपुर पुलिस कमिश्नर के पद से वीआरएस लिया और 2022 में कन्नौज से बीजेपी की टिकट पर चुनाव जीता. अब वे उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्यमंत्री हैं। उनके पिता, राम अरुण, दो बार उत्तर प्रदेश के डीजीपी रह चुके हैं, इस प्रकार उनके परिवार में प्रशासनिक तथा राजनैतिक दोनों ही क्षेत्रों में एक अद्भुत विरासत दिखाई देती है।

एक प्रेरणादायक कहानी

असीम अरुण की कहानी एक प्रेरणादायक कहानी है. यह दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति कठिनाइयों का सामना करके अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है. उनका अनुभव न केवल एनएसजी की ट्रेनिंग की कठिनाइयों का प्रमाण है, बल्कि साथियों के समर्थन और व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प की भी एक शानदार मिसाल है। यह कहानी युवाओं को प्रेरणा देती है कि अपने सपनों को हासिल करने के लिए कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए।

असीम अरुण के जीवन से सीखें

असीम अरुण की यह यात्रा सिर्फ एक कठिन प्रशिक्षण के बारे में नहीं है, यह जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने और अपने सपने को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प के बारे में भी है. उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और साथियों के समर्थन के माध्यम से सफलता हासिल की। उनका राजनीति में प्रवेश भी एक साहसिक कदम था जिसने उन्हें जनता की सेवा करने का अवसर दिया। उनकी कहानी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

टेक अवे पॉइंट्स

  • कठोर परिश्रम और दृढ़ संकल्प से सफलता अवश्य मिलती है।
  • साथियों का समर्थन कठिन समय में कितना महत्वपूर्ण होता है।
  • जीवन में नये अवसरों को गले लगाना जरूरी है।
  • अपने सपने को पूरा करने के लिए हिम्मत और साहस होना आवश्यक है।

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