नोएडा किसानों का दिल्ली कूच: ज़मीन, मुआवज़ा और संघर्ष

दिल्ली कूच पर अड़े किसान: नोएडा से दिल्ली तक का सफ़र

आज का दिन नोएडा के किसानों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि हज़ारों की संख्या में किसान दिल्ली कूच करने जा रहे हैं! दिल्ली कूच किसानों की अपनी मांगों को लेकर सरकार तक पहुँचाने की एक बड़ी कोशिश है. क्या होगा इस आंदोलन का नतीजा? क्या सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देगी? इस आर्टिकल में हम इस आंदोलन के पीछे की कहानी और किसानों की मांगों को विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे.

आंदोलन की शुरुआत और बढ़ता दबाव

संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में यह आंदोलन नोएडा प्राधिकरण की भूमि अधिग्रहण नीतियों के विरोध में शुरू हुआ था. लंबे समय से किसान अपनी मांगों को लेकर नोएडा प्राधिकरण का घेराव कर रहे थे, लेकिन सरकार से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने दिल्ली कूच का फैसला लिया. इस फैसले से दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और पुलिस ने सख्त सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं. रास्ते में भारी जाम की भी आशंका है.

किसानों की मुख्य मांगें

किसानों की कई अहम मांगे हैं, जिनपर वो ज़ोर दे रहे हैं:

  • भूमि अधिग्रहण मुआवजे में बढ़ोतरी: किसानों का कहना है कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार 1 जनवरी 2014 के बाद अधिग्रहित भूमि का 4 गुना मुआवजा मिलना चाहिए. वर्तमान मुआवजा बहुत कम है और उनके जीवन-यापन को नहीं संभाल पाता.
  • विकसित प्लॉट की मांग: किसानों की एक अहम मांग यह भी है कि उन्हें अधिग्रहीत जमीन के बदले में 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट दिए जाएं. इससे उन्हें अपनी आजीविका के नए साधन जुटाने में मदद मिलेगी।
  • नए भूमि अधिग्रहण कानून का लाभ: किसानों का आरोप है कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के लाभ गौतमबुद्ध नगर जिले में लागू नहीं हो रहे हैं. इससे वे बुरी तरह प्रभावित हैं.
  • रोजगार और पुनर्वास: किसान चाहते हैं कि भूमिहीन और भूमिधर किसानों के बच्चों को रोजगार के अवसर मिले और उन्हें उचित पुनर्वास की सुविधाएँ उपलब्ध हों. यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि जमीन अधिग्रहण से उनकी आजीविका न छीनी जाए।
  • हाई पावर कमेटी की सिफारिशें: किसानों की मांग है कि सरकार द्वारा गठित हाई पावर कमेटी की सिफारिशें लागू की जाएं जिससे उनकी समस्या का समाधान हो सके।

दिल्ली कूच के बाद क्या होगा?

किसानों के दिल्ली कूच के बाद कई संभावनाएं हैं:

  • संसद घेराव: किसानों का इरादा संसद का घेराव करने का भी हो सकता है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
  • वार्ता: सरकार किसानों से बातचीत करने का फैसला कर सकती है, जिससे उनका विरोध कम हो और उनका समस्याओं को सुलझाया जा सके।
  • आंदोलन का तेज होना: अगर सरकार किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो आंदोलन और भी तेज हो सकता है. और कई अन्य जगहों पर भी आंदोलन शुरू हो सकते हैं।

ट्रैफ़िक और सुरक्षा की चुनौतियाँ

किसानों के दिल्ली कूच से दिल्ली और नोएडा में ट्रैफ़िक जाम की स्थिति पैदा हो सकती है. पुलिस ने इस स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं और यातायात को नियंत्रित करने की कोशिश की है. पुलिस ने यात्रियों को मेट्रो का उपयोग करने की सलाह दी है।

अन्य किसान संगठनों का समर्थन

भारतीय किसान परिषद (BKP), किसान मजदूर मोर्चा (KMM) और कई अन्य किसान संगठन नोएडा के किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं और आने वाले दिनों में पंजाब और हरियाणा के किसान भी आंदोलन में शामिल हो सकते हैं।

टेक अवे पॉइंट्स

  • नोएडा के किसान अपनी ज़मीन के मुआवज़े और पुनर्वास को लेकर दिल्ली कूच कर रहे हैं.
  • किसानों की मांगें जायज़ हैं और सरकार को इन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
  • इस आंदोलन से दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर ट्रैफ़िक प्रभावित हो सकता है.
  • इस आंदोलन से आगे चलकर और किसान संगठन भी जुड़ सकते हैं।

यह आंदोलन किसानों के हक़ और उनके अस्तित्व से जुड़ा है. आइए उम्मीद करें कि सरकार और किसानों के बीच बातचीत से सकारात्मक हल निकल सकेगा।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *