लखनऊ. उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ की चुनाव प्रचार के लिए डिमांड बढ़ गयी है. जिन राज्यों में चुनाव प्रस्तावित हैं, वहां योगी के प्रचार की मांग जोर पकड़ती नजर आ रही है. पिछले महीने ही हुए गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव में योगी स्टार प्रचारक की भूमिका में दिखे थे. इतना ही नहीं केरल में लाल आतंक के खिलाफ भी भाजपा के लिए योगी मुख्य किरदार में दिखे थे और अब जबकि पार्टी का फोकस नॉर्थ ईस्ट है, योगी एक बार फिर बड़ी भूमिका निभाते दिखने वाले हैं. खासकर त्रिपुरा और कर्नाटक चुनाव में योगी की डिमांड जोरों पर है.
त्रिपुरा में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान योगी आदित्यनाथ का दो दिवसीय कार्यक्रम प्रस्तावित है. इन दो दिनों में योगी राज्य में नाथ संप्रदाय के लोगों का वोट बटोरने का प्रयास करेंगे. यहां चर्चा कर दें कि योगी आदित्यनाथ खुद नाथ संप्रदाय से संबंध रखते हैं. यही वजह है कि यहां उनको मुफीद माना जा रहा है. भाजपा ने यहां उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ायी है. उन्हें सत्तारुढ़ मानिक सरकार के खिलाफ संभावनाओं को तलाशने की भी जिम्मेदारी सौंपी गयी है. वहीं त्रिपुरा के बाद कर्नाटक में चुनाव होने हैं, यहां भी पीएम नरेंद्र मोदी के बाद सबसे अधिक डिमांड योगी की ही है.
अगरतला के गोरखनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी की मानें तो त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय के बहुत अनुयायी निवास करते हैं जिनमें से अधिकांश अनुयायी पिछड़ी जाति के हैं. राज्य में पिछड़ी जातियों के लिए कोटा नहीं है इसलिए अनुयायी चाहते हैं कि उन्हें पिछड़ी जाति का कोटा सरकार दे. सूबे में एससी-एसटी के लिए 48 फीसदी कोटा है. उनके पुजारी इस मामले को संबधिंत लोगों के समक्ष रखेंगे.
पिछली कर्नाटक यात्रा को याद करें तो इस दौरान योगी आदिचुंचुनागरी मठ में एक रात ठहरे थे. नाथ संप्रदाय के इस मठ के प्रमुख निर्मलानंद नाथ स्वामी हैं. योगी की इस यात्रा को महत्वपूर्ण जुड़ाव के तौर पर भी देखा गया था. ऐसे में भाजपा नाथ संप्रदाय के बहाने योगी को आगे करके कर्नाटक में सत्ता पर काबिज होने का जुगाड़ लगा रही है. दरअसल, योगी आदित्यनाथ भाजपा में पहले से भगवा स्टार प्रचारक की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं. वह हिंदुत्व का चेहरा हैं. ऐसे में हिंदू वोटरों को लुभाने के लिए योगी आदित्यनाथ भाजपा के चुनावों में हमेशा ही मुफीद रहे हैं.
वर्तमान में योगी देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में उनकी लोकप्रियता और बढ़ी चुकी है और भाजपा इन चुनावों में इसी लोकप्रियता को भुनाते हुए सत्ता में आने की तैयारी में जुटी है.
Read More : किसानों का 50 हजार तक का कर्ज माफ वसुंधरा सरकार ने किया
Leave a Reply