मेरठ मेडिकल कॉलेज में जीवित युवक को मृत घोषित: एक चौंकाने वाला मामला

मेरठ मेडिकल कॉलेज में जीवित युवक को मृत घोषित करने का मामला: एक चौंकाने वाली सच्चाई

क्या आप कल्पना कर सकते हैं? एक युवक, जिंदा सांस ले रहा है, अचानक मृत घोषित कर दिया जाता है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है! जी हाँ, ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज से सामने आया है, जिसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। इस घटना ने न केवल मेडिकल लापरवाही पर सवाल उठाए हैं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर चिंताएँ जताई हैं। आइए जानते हैं इस पूरी कहानी को विस्तार से।

घटना का विवरण: कैसे हुआ यह सब?

यह घटना मेरठ के सरूरपुर थाना क्षेत्र के गांव गोटका के रहने वाले शगुन के साथ हुई। बुधवार की रात को, शगुन अपने भाई प्रिंस के साथ बाइक से खतौली जा रहा था जब एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में दोनों भाई गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायलों को तुरंत पास के सीएचसी ले जाया गया, जहाँ शगुन की गंभीर हालत को देखते हुए उसे लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। कई घंटों के इलाज के बाद, डॉक्टरों ने शगुन को मृत घोषित कर दिया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

लेकिन यहीं पर कहानी का एक दिलचस्प मोड़ आता है। जब शगुन को स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा था, तभी उसके परिजनों ने दावा किया कि उन्होंने शगुन की सांसें चलती हुई देखीं और उसे हिलते-डुलते और कराहते हुए सुना। यह देखकर परिजन सकते में आ गए और उन्होंने डॉक्टरों से सवाल किया।

परिजनों का आरोप और डॉक्टरों का पक्ष

परिजनों के विरोध के बाद, शगुन को वापस ICU में ले जाया गया। लेकिन फिर से उसे मृत घोषित कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर अखिल प्रकाश शर्मा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शगुन दिमागी रूप से मृत हो चुका था और 10 घंटे तक उसे बचाने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।

डॉक्टरों ने यह भी दावा किया कि जब पुलिस शगुन को लेने आई, तब मशीनों से दी जा रही सांस को हटा दिया गया था। परिजनों के आग्रह पर दोबारा ICU में जाँच की गई, लेकिन तब तक शगुन की मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़ी गलतफहमी बताया है।

पुलिस जाँच में क्या निकला?

पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और सभी पहलुओं पर गौर कर रही है। इस मामले में मेडिकल कॉलेज की लापरवाही की बात सामने आ रही है।

इस घटना से उठते सवाल

यह मामला कई सवालों को जन्म देता है। क्या मेडिकल कॉलेज में लापरवाही बरती गई? क्या शगुन की जान बचाई जा सकती थी? क्या इस घटना में डॉक्टरों की कोई भूमिका है? इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच के बाद ही मिल पाएगा। लेकिन इस घटना ने हमारे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मौजूद खामियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

टेक अवे पॉइंट्स

  • मेडिकल लापरवाही एक गंभीर समस्या है जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • स्वास्थ्य सेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
  • ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।
  • पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

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