मैनपुरी में ज़मीन विवाद: डीएम की जनसुनवाई में मां-बेटी ने किया हंगामा!

मैनपुरी में मां-बेटी का हंगामा: ज़मीन विवाद में डीएम की जनसुनवाई में हुआ बवाल!

क्या आप जानते हैं कि मैनपुरी में ज़मीन विवाद के चलते एक मां-बेटी ने डीएम की जनसुनवाई में जमकर हंगामा किया? इस घटना ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है। यह मामला इतना तूल पकड़ गया कि पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा और अंततः मां-बेटी को गिरफ्तार कर लिया गया। आइए, जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम के बारे में विस्तार से।

ज़मीन कब्ज़े का विवाद

किशनी तहसील के बहरामऊ गाँव की रहने वाली राधा देवी और उनकी बेटी दिव्या अपनी ज़मीन पर हुए कब्ज़े को लेकर डीएम से शिकायत करने पहुँचीं। उन्होंने आरोप लगाया कि गाँव के कुछ दबंग लोग उनकी ज़मीन पर कब्ज़ा किये हुए हैं, और राजस्व अधिकारियों के निशान लगाने के बाद भी उन्होंने दोबारा कब्ज़ा कर लिया है। आरोपियों में सुनील, अनिल, सुभाष, काशीराम, राकेश और विवेक के नाम शामिल हैं।

डीएम का आश्वासन और फिर हंगामा

डीएम ने लगभग 5 मिनट तक उनकी शिकायत सुनी और मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया। लेकिन, राधा देवी और उनकी बेटी डीएम के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुईं और उनसे बहस करने लगीं, यहाँ तक कि आत्महत्या की धमकी भी देने लगीं। डीएम के बार-बार समझाने के बावजूद वे नहीं मानीं। इस घटनाक्रम से पहले कलक्ट्रेट परिसर में ज्वलनशील पदार्थ डालकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने के घटना को ध्यान में रखते हुए, डीएम ने एहतियात के तौर पर पुलिस को दोनों महिलाओं को हिरासत में लेने का निर्देश दिया।

पुलिस कार्रवाई और चालान

पुलिस ने दोनों महिलाओं को थाने ले गई और शांति भंग करने के आरोप में उनका चालान कर दिया। बाद में, एसडीएम किशनी ने उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया, साथ ही ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न करने की सख्त हिदायत दी।

डीएम का स्पष्टीकरण

डीएम अंजनी कुमार सिंह ने इस मामले में मीडिया को स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने किसी को भी जेल भेजने की बात नहीं कही थी। उनका कहना था कि मां-बेटी का ज़मीन को लेकर विवाद था और उन्होंने मामले की जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन महिलाएं बार-बार आत्महत्या की धमकी दे रही थीं, इसीलिए एहतियातन उन्हें थाने भेजा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में चल रही खबरें असत्य और निराधार हैं।

Take Away Points

  • ज़मीन विवाद एक गंभीर मुद्दा है जिससे अक्सर हिंसा और झगड़े होते हैं।
  • सरकारी अधिकारियों को ऐसे विवादों को निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ सुलझाना चाहिए।
  • इस घटना से यह सबक मिलता है कि हिंसा और धमकी का सहारा लेना कभी भी समस्या का समाधान नहीं होता।
  • प्रशासन को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

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