ग्रेटर नोएडा किसान आंदोलन: दिल्ली कूच की कहानी

ग्रेटर नोएडा में किसानों का प्रदर्शन: दिल्ली कूच का ऐलान और उसके परिणाम

क्या आप जानते हैं कि ग्रेटर नोएडा में किसानों का आक्रोश किस मुद्दे पर इतना बढ़ गया है कि उन्होंने दिल्ली कूच का ऐलान कर दिया? यह आंदोलन, जो पहले ही नोएडा और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल बना चुका है, अब दिल्ली की सीमाओं तक पहुँचने की धमकी दे रहा है। इस लेख में हम आपको इस किसान आंदोलन की पूरी कहानी, इसकी मांगों, और प्रशासन की प्रतिक्रिया के बारे में विस्तार से बताएँगे। तैयार हो जाइए, क्योंकि यह कहानी दिलचस्प मोड़ लेने वाली है!

किसानों की प्रमुख माँगे: क्या है असली मुद्दा?

किसानों का मुख्य मुद्दा है, नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत उचित मुआवजा और पुनर्वास। वे दावा करते हैं कि 1 जनवरी 2014 के बाद अधिग्रहीत भूमि के लिए उन्हें 4 गुना मुआवजा मिलना चाहिए। साथ ही, वे 10 फीसदी विकसित भूखंड और 64.7 फीसदी की दर से अतिरिक्त मुआवजा चाहते हैं। गौरतलब है कि गौतमबुद्ध नगर में पिछले 10 सालों से सर्किल रेट नहीं बढ़ाया गया है, जिससे किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, भूमिहीन किसानों के बच्चों के लिए रोजगार और पुनर्वास की व्यवस्था करने की भी मांग है।

पुलिस की सख्त कार्रवाई: गिरफ्तारियाँ और धारा 163

दिल्ली कूच के ऐलान के बाद, पुलिस प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए कई किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है। प्रमुख किसान नेता रूपेश वर्मा और विकास प्रधान, जिन्होंने दिल्ली कूच का ऐलान किया था, भी गिरफ्तार किए गए हैं। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए, ग्रेटर नोएडा को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है, और पुलिस, सीआरपीएफ, और पीएसी की भारी तैनाती की गई है। धारा 163 लागू करके, प्रशासन ने प्रदर्शनों और महापंचायतों पर रोक लगा दी है। प्रसिद्ध किसान नेता राकेश टिकैत को भी ग्रेटर नोएडा आने से रोक दिया गया था।

जनता का गुस्सा: क्या है आगे का रास्ता?

किसानों का यह आंदोलन न केवल उनके हितों के लिए, बल्कि भूमि अधिग्रहण नीतियों में सुधार के लिए भी एक आवाज उठाता है। किसानों की माँगें जायज़ हैं या नहीं, यह एक अलग बहस का विषय है, लेकिन उनके गुस्से और निराशा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। सरकार को किसानों की समस्याओं को समझते हुए, एक समाधान खोजने की ज़रूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे तनावपूर्ण हालात पैदा न हों। क्या सरकार इस आंदोलन का समाधान ढूंढ पाएगी? यह समय ही बताएगा।

क्या दिल्ली कूच होगा सफल?

दिल्ली कूच की सफलता कई कारकों पर निर्भर करेगी, जिसमें पुलिस की तैनाती, किसानों की संख्या, और सरकार की प्रतिक्रिया शामिल हैं। हालाँकि, यह आंदोलन निश्चित रूप से सरकार पर दबाव बनाएगा और भूमि अधिग्रहण नीतियों में बदलाव की उम्मीद जगाएगा। इस मुद्दे का आगे क्या होगा? क्या किसान अपनी मांगों में सफल होंगे? क्या बातचीत से कोई रास्ता निकलेगा? आगे के दिन ही बताएँगे।

Take Away Points

  • ग्रेटर नोएडा में किसानों का आंदोलन भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव की मांग पर केंद्रित है।
  • किसानों ने दिल्ली कूच का ऐलान किया है जिसके कारण प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है।
  • कई किसान नेताओं को गिरफ्तार किया गया है और धारा 163 लागू की गई है।
  • किसानों का आंदोलन भूमि अधिग्रहण नीतियों में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

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