गाज़ियाबाद। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजियाबाद (Ghaziabad) के डीएम अजय शंकर पांडे (DM Ajay Shankar Pandey) ने लोगाें के लिए एक मिसाल कायम की है। उन्होंने पानी की बर्बादी होने पर खुद पर जुर्माना लगाया। इतना ही नहीं उन्होंने अपने अधिकारियों पर भी अर्थदंड लगाया। इसके बाद डीएम ने अपनी जेब से 10 हजार रुपये जमा कराए।यह जुर्माना तब लगाया गया, जब उन्हें पता चला कि उनके कार्यालय के पीछे लगे पानी के टैंक से पानी ओवरफ्लो हो रहा है।
पानी बचाने के लिए कई जागरुकता अभियान चल रहे हैं। लोगों से पानी बचाने की अपील की जा रही है। जिला कलेक्ट्रेट में 30 वरिष्ठ अधिकारी हैं। जिनमें से प्रत्येक को 100 रुपए जुर्माना देना पड़ा। बचे हुए 100 स्टाफ कर्मचारियों को 70 रुपए प्रति व्यक्ति जुर्माना भरना पड़ा।
जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय (Ajay Shankar Pandey) ने बताया कि इस पैसे का इस्तेमाल पानी के संरक्षण के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर किया जाएगा। पानी के टैंक में जो कमी है उसको भी ठीक कराया गया है। उन्होंने कहा कि पानी को बचाना सबकी जिम्मेदारी है। फिलहाल देश में जल शक्ति अभियान चल रहा है।
सभी स्रोतों से पानी को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा कई बार विभिन्न विभागों को पानी बचाने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। जुर्माना अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति और जागरुक करेगा। उन्होंने कहा कि मैं यहां सबसे वरिष्ठ हूं, इसलिए यह मेरी जिम्मेदारी भी है।
जिलाधिकारी का ध्यान इसकी तरफ उस समय गया जब सोमवार को अपने कार्यालय पहुंचने के बाद वह कार्यालय के बराबर में मौजूद रेस्टरूम में गए। उस समय उन्हें पानी के बहने की आवाज सुनाई दी। जिसके बाद उन्होंने अपने कर्मचारियों से इसका पता लगाने के लिए कहा।
इस पर स्टाफ ने उन्हें बताया कि रेस्टरूम के पीछे जो टैंक लगा है। दस मिनट से उसके ओवरफ्लो होने के कारण यह आवाज आ रही है। जिस पर उन्होंने खुद समेत पूरे स्टाफ पर पश्चाताप शुल्क के रूप में 10,000 का जुर्माना लगाया।
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