381 करोड़ की साइबर ठगी से बचे पूर्व आईजी डीके पांडा! जानिए पूरी कहानी

साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला! पूर्व आईजी डीके पांडा को 381 करोड़ रुपये की ठगी से बचाया गया

क्या आप जानते हैं कि कैसे एक पूर्व आईजी को साइबर ठगों ने 381 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाने की कोशिश की? यह सच है! प्रयागराज में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ ‘दूसरी राधा’ के नाम से प्रसिद्ध डीके पांडा साइबर अपराधियों के शिकार बनने से बाल-बाल बचे। उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आइये, इस पूरे मामले की गहराई से जानकारी प्राप्त करें और जानें कि कैसे आप खुद को इस तरह की ठगी से बचा सकते हैं।

381 करोड़ रुपये का झांसा!

यह घटना 26 अक्टूबर 2024 को हुई जब डीके पांडा को एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप्प कॉल किया। ठग ने खुद को ‘अरव शर्मा’ बताया और दावा किया कि पांडा जी ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में 381 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है! यह पैसा साइप्रस सिटी के साइप्रस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन से जुड़ा हुआ बताया गया, जो पूरे यूरोपीय संघ में व्यापार करता है। ठग ने यह भी कहा कि लंदन के वित्त विभाग में काम करने वाले राहुल गुप्ता और फिनिक्स ग्रुप के विनीत गोयल ने इस ट्रेडिंग में मदद की है। यह सब सुनकर पांडा जी भी हैरान रह गए होंगे! लेकिन पांडा जी के पास इतने पैसे कमाने का कोई साधन नहीं है। फिर भी यह झांसा कितना बड़ा है! यह सवाल आपके मन में भी जरूर आया होगा कि ऐसे झूठे दावों पर कोई कैसे विश्वास कर सकता है?

साइबर अपराधियों की चालाकी

साइबर अपराधी अक्सर लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। वे अपनी बातों से लोगों को प्रभावित करने और विश्वास दिलाने में माहिर होते हैं। उनके पास कहानियां गढ़ने का हुनर होता है जिस पर भरोसा करना आसान होता है। उन्होंने ‘अरव शर्मा’ का किरदार बनाया और बहुत ही आत्मविश्वास से बात की, ताकि पांडा जी उन पर भरोसा कर लें। ये बात साफ करती है की कितना अहम है कि हम ऑनलाइन संपर्क में सावधानी बरतें और अनजान लोगों पर विश्वास न करें।

8 लाख रुपये की मांग और पुलिस में शिकायत

अब सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ठगों ने अपने इस ‘मुनाफे’ को पांडा जी के बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए 8 लाख रुपये की मांग की! यहाँ ठगों की मंशा साफ दिखती है। वे पैसे लेना चाहते थे और फिर गायब हो जाते। लेकिन पूर्व आईजी के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। उन्होंने तुरंत मामले को समझा और धूमनगंज थाने में एक एफआईआर दर्ज करवाई। अगर ये 8 लाख रुपये भी जमा कर दिए जाते, तो शायद बाद में और भी पैसे मांगे जाते। पांडा जी ने समय रहते शिकायत करके अपना नुकसान होने से बचा लिया। इससे सीख मिलती है कि साइबर अपराधियों के झांसे में न आएं, और हमेशा सतर्क रहें।

आप भी बरतें सावधानी

इस घटना से हम सभी को साइबर अपराधों के बारे में जागरूक होना चाहिए। हमें अनजान लोगों से सावधान रहना चाहिए और ऑनलाइन संपर्क में पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए। कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी, खासकर बैंक डिटेल्स, शेयर न करें।

जांच जारी, पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और ठगों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा। यह मामला साइबर अपराधों के खतरे को दिखाता है और लोगों को ऐसे अपराधों से बचने के लिए सावधान रहने की चेतावनी देता है।

पुलिस की भूमिका और आपकी सुरक्षा

पुलिस का तेजी से हस्तक्षेप सराहनीय है। लेकिन हम अपनी तरफ से भी सावधानी बरत सकते हैं। हमारे पास कई तरह के सुरक्षा उपाय हैं। अगर आप साइबर अपराध का शिकार होते हैं तो तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करें। साथ ही, आपकी ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के बारे में जानना जरूरी है।

Take Away Points

  • साइबर अपराधियों से सतर्क रहें।
  • अनजान लोगों पर भरोसा न करें।
  • अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें।
  • किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
  • ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूक रहें।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *