लखनऊ। पीएम नरेन्द्र मोदी के आह्रवान पर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए 22 मार्च को देश भर में जनता कर्फ्यू लागू हुआ है । इसे देखते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के स्लाटर हाउस पर रोक लगा दी गई है। रोक के बाद शहरों में मीट की सप्लाई प्रभावित हुई है।
यह रोक 22 मार्च से 24 मार्च तीन दिन तक जारी रहेगी। यह पाबंदी सरकारी स्लाटर हाउस पर लगाई गई है, लेकिन लीज पर इनका संचालन प्राइवेट कंपनियां कर रही हैं. फिलहाल यूपी के 15 शहरों में इस तरह के स्लाटर हाउस का संचालन किया जा रहा है। रोक लगाने के आदेश पशुधन मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने विभागीय अधिकारियों को जारी किए हैं।
झांसी समेत पश्चिमी यूपी के 15 शहरों में सरकारी स्लाटर हाउस हैं। इनकी देखरेख नगर निगम की ओर से की जाती है । लेकिन, यहां भैंस काटने और उसके मीट को शहर में सप्लाई करने का काम प्राइवेट कंपनियां करती हैं । नगर विकास विभाग की मानें तो सभी स्लाटर हाउस से मीट की लोकल सप्लाई की जाती है, लेकिन अगर लोकल सप्लाई से मीट बचता है तो प्राइवेट कंपनी चाहे तो उसे एक्सपोर्ट भी कर सकती है। अलीगढ़ में एक साल में 13 लाख से ज़्यादा भैंस कटती हैं. वहीं, उन्नाव में 7 लाख तो बरेली में 4 लाख भैंस हर साल कटती हैं । नगर विकास विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार 15 शहरों में हर रोज करीब 12 हजार भैंस कटती हैं।
15 शहरों में 54 करोड़ रुपये रोज का है कारोबार
रोज की 12 हज़ार और महीने की 3.5 लाख से ज़्यादा तो साल की 40 लाख से ज़्यादा भैंस यूपी के इन 15 शहरों में कटती हैं । एक भैंस से 175 किलो से लेकर 200 किलो तक मीट निकलता है । बाज़ार में मीट की कीमत 200 रुपये किलो है। इसके अलावा काटी गई भैंस की दूसरी चीजें भी बिकती हैं। कुल मिलाकर कटने के बाद एक भैंस करीब 45 हजार रुपये में बिक जाती है।
यूपी के जिन 15 शहरों में सरकारी स्लाटर हाउस हैं वो अलीगढ़, उन्नाव, बरेली, आगरा, शामली, झांसी, बाराबंकी, बुलन्दशहर, मुजफ्फरनगर, अमरोह, बिजनौर, सहारनपुर, रामपुर, संभल, गाज़ियाबाद हैं। हर स्लाटर हाउस में भैंस काटने और उसे बेचने का काम प्राइवेट कंपनी कर रही हैं।
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