मेरठ। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ मेरठ में पिछले सप्ताह हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में मारे गए लोगों के परिजनों से मिलने जा रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को पुलिस ने मंगलवार को शहर में प्रवेश करने से पहले रोक दिया, जिसके बाद वे वापस दिल्ली लौट गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल और प्रियंका दोनों को मेरठ के बाहर परतापुर से वापस लौटा दिया गया।
दोनों नेताओं के मेरठ में मृतकों के परिजनों से मिलने के लिए दिल्ली से रवाना होने की खबर मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। राहुल गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें कोई आदेश नहीं दिखाया गया, लेकिन उन्हें वापस जाने के लिए बोल दिया गया।
उन्होंने कहा, “हमने पुलिस से कहा कि हम सिर्फ तीन लोग जाएंगे, लेकिन वे राजी नहीं हुए।” राहुल और प्रियंका के साथ पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी भी थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय साहनी ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को जिले में लागू निषेधाज्ञा के कागज दिखाए गए और ‘वे खुद लौट गए।’
कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने पीड़ित के परिजनों से कथित तौर पर फोन पर राहुल, प्रियंका की बात कराई। एसएसपी ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के मेरठ दौरे से धारा 144 का उल्लंघन हो जाता और तनाव उत्पन्न होता।
राज्य में सीएए विरोधी प्रदर्शनों में अब तक 16 लोगों के मारे जाने की आधिकारिक सूचना मिली है। प्रियंका ने पहले बिजनौर का दौरा किया था और हिंसा में मारे गए दो लोगों के परिजनों से मुलाकात भी की थी। सोमवार को राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे हमले शुरू करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश को उसके कपड़ों से पहचानते हैं, क्योंकि वे दो करोड़ रुपए का सूट पहनते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस बयान का हवाला दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि सीएए के विरोध में आंदोलन करने वाले अपने कपड़ों से पहचाने जा सकते हैं।
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