AYODHYA CASE : अपने पक्ष में फैसले का VHP को भरोसा, राम मंदिर बनने का मार्ग होगा प्रशस्त

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नई दिल्ली। अयोध्या मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है और ऐसे में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) को भरोसा है कि शीर्ष अदालत ऐसा आदेश देगी, जिससे वहां भव्य राम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने आईएएनएस से कहा, तथ्यों, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले और सबसे ऊपर पूरी दुनिया के विश्वास को देखते हुए हम आश्वस्त हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में होगा और इससे अयोध्या में राम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। दशकों से राम मंदिर आंदोलन के अगुआ रहे विहिप की अपेक्षाओं के बारे पूछने पर उन्होंने यह बयान दिया।

सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे की सुनवाई 17 अक्टूबर को पूरी हो जाएगी और इस मामले में 17 नवंबर को फैसला सुनाया जा सकता है। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वहीं हिंदू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन ने इस मुद्दे पर कहा, इस पर हमारा मत बिल्कुल स्पष्ट है कि हमें इस मामले में किसी मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की पहले ही 38 दिनों तक सुनवाई हो चुकी है, जिनमें 16 दिन हिंदू पक्ष ने और शेष दिन मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में अपने पक्ष रखे।

जैन ने कहा, अब उम्मीद है कि मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें बहुत जल्द पूरी करेगा। भविष्य की योजना के बारे में पूछने पर जैन ने कहा, यह पूरी तरह माननीय सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्ष पर निर्भर करता है। फैसले के बाद ही हम निर्णय ले सकेंगे कि हम समीक्षा याचिका दायर करेंगे या संसद का रास्ता अपनाएंगे। उससे पहले सबसे महत्वपूर्ण बात आदेश है।

सुप्रीम कोर्ट ने चार अक्टूबर को कहा था कि 70 साल पुराने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की सुनवाई वह 17 अक्टूबर को पूरी कर देगा। हिंदू पक्षों ने बार-बार तर्क दिया है कि मस्जिद के नीचे मंदिर की मौजूदगी के सबूत बताने वाली और यात्रियों के यात्रा वृत्तांतों और पश्चिम से आने वाले भौगोलिक विशेषज्ञों द्वारा तैयार भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट यहां भगवान राम के जन्मस्थान होने के हिंदुओं के विश्वास को और मजबूत करती है, जिससे बहस के दौरान उनका पलड़ा भारी होता है। हिंदू पक्ष ने यह दावा करते हुए बहस करने में कम समय लिया कि विवादित भूमि पर उसका दावा सही है, लेकिन पीठ में न्यायाधीशों द्वारा किए गए सवालों पर तेज और प्रभावी जवाब दिए।

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ में इस सप्ताह मुस्लिम पक्ष की अंतिम दलील दाखिल होगी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूण और न्यायमूर्ति एस.ए. नजीर शामिल हैं। साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने फैसला सुनाया था कि तीनों पक्षों में विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाएगा। इनमें एक-तिहाई सुन्नी वक्फ बोर्ड, एक-तिहाई निर्मोही अखाड़ा और एक-तिहाई रामलला के पक्ष को दिया जाएगा। इस पीठ में न्यायमूर्ति एस.यू. खान, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.वी. शर्मा शामिल थे।

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