300 लोगों से ठगी रेलवे में नौकरी के नाम पर, 2 गिरफ्तार

300 लोगों से ठगी रेलवे में नौकरी के नाम पर, 2 गिरफ्तार

गाजियाबाद: देशभर के युवाओं को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के 2 बदमाशों को ट्रॉनिका सिटी थाने की पुलिस ने गुरुवार रात गिरफ्तार किया। इनके पास से रेलवे के 20 फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर, 5 मेडिकल लेटर और रेलवे के नाम वाले लिफाफे बरामद हुए हैं। गिरोह करीब 300 लोगों को ठग चुका है।
एसपी देहात नीरज कुमार जादौन ने बताया कि ट्रॉनिका सिटी में कुछ लोगों ने रुपये लेकर रेलवे में जॉब लगवाने का दावा करने वाले कुछ लोगों की जानकारी दी थी। इस मामले में कुछ दिन पहले एक अनाम शिकायत भी थाने में आई थी। इस पर काम करते हुए गुरुवार रात ट्रॉनिका सिटी थाना पुलिस की टीम ने गैंग के सदस्य विकास और सचिन को गिरफ्तार कर लिया।

दोनों दिल्ली के रहने वाले हैं। वहीं इस गैंग का सरगना हितेश नागपुर का रहने वाला है। गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्ति दिल्ली में हितेश के एक बार में जॉब करते हैं। गिरोह रेलवे में नौकरी के नाम पर एक शख्स से 8 से 10 लाख रुपये लेता है। हितेश की गिरफ्तारी के लिए नागपुर पुलिस से मदद ली जाएगी।

जॉब वेबसाइट पर डालते थे विज्ञापन
एसपी देहात के अनुसार, पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि गैंग की तरफ से विभिन्न जॉब वेबसाइट पर विज्ञापन डाला जाता था। विज्ञापन देखने के बाद बड़ी संख्या में जॉब तलाश रहे युवा उनसे संपर्क करते थे। संपर्क करने वालों को गैंग रेलवे का एक फॉर्म भेजता था। 2-3 दिन बाद गैंग का एक सदस्य एक-एक शख्स से मिलकर फॉर्म भरवाने के नाम पर 5 हजार रुपये जमा कराता था।

जॉब की चाहत रखने वालों को कोई शक न हो इसके लिए गिरोह इन्हें दिल्ली के बड़ौदा हाउस स्थित उत्तर रेलवे के हेडक्वॉर्टर के पास बुलाया जाता था। यहां ऑफिस के बाहर गैंग के कुछ लोग खड़े रहते थे और खुद को रेलवे स्टाफ बताकर उनके फॉर्म जमा कर लेते थे और डिटेल एक रजिस्टर में लिखते थे। इसके बाद आगे की प्रक्रिया कराने के नाम पर 1 कैंडिडेट से 8-10 लाख रुपये मांगे जाते थे।

रेलवे अस्पताल में फर्जी मेडिकल और फिर ट्रेनिंग

पकड़े गए ठगों ने बताया कि लोगों को विश्वास दिलाने के लिए गैंग की तरफ से लोगों को रेलवे के लेटरहेड पर मेडिकल लेटर भेजा जाता था। इसमें रेलवे के विभिन्न अस्पतालों के एड्रेस होते थे। यह मिलने के बाद उन्हें एक नंबर देकर किसी एक अस्पताल भेजा जाता था। वहां सुनसान स्थान पर गैंग का ही सदस्य खुद को डॉक्टर बता जॉब के लिए आए लोगों का मेडिकल करता था। इसके बाद कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग का लेटर इशू किया जाता था।

ट्रेनिंग के लिए नॉर्दर्न रेलवे के अलग-अलग स्टेशनों पर भेजा जाता था। इन स्टेशनों पर गैंग के कुछ सदस्य पहले से मौजूद रहते थे और खुद को रेलवे अफसर बताकर उनको फर्जी ट्रेनिंग देते थे। फर्जी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद गिरोह डाक के जरिये अपॉइंटमेंट लेटर भेजता था। यहां तक की प्रक्रिया में सारे पैसे वसूल लिए जाते थे। अपॉइंटमेंट लेटर में 1-2 महीने बाद जॉइन करने की बात कही जाती थी, जब कैंडिडेट्स वहां जाते थे तो ठगी का पता चलता था। आरोपितों ने बताया कि फर्जी पेपर तैयार करने का काम हितेश का होता था।

फर्जी पेपर ऐसा कि अफसर भी खा जाते थे धोखा
एसपी देहात ने बताया कि गिरोह इतनी सतर्कता से काम करता था कि इन पर शक करना बहुत मुश्किल होता था। ये लोग रेलवे का फर्जी लेटरहेड, फॉर्म, ट्रेनिंग लेटर, मेडिकल लेडर और फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर तैयार करते थे। ये बिल्कुल असली लगते थे। यही नहीं जॉब के लिए इनकी तरफ से एक वेरिफिकेशन फॉर्म भेजा जाता था, जिसे गजेटेड रैंक के अफसर से अटेस्ट कराने को कहा जाता था।

ये फर्जी फॉर्म इतनी सावधानी से बनाया जाता था कि अफसर भी इसे पकड़ नहीं पाते थे और साइन कर देते थे। एसपी देहात का कहना है कि इस मामले में नॉर्दर्न रेलवे के अधिकारियों से बात की जाएगी और चेक किया जाएगा कि कहीं विभाग का कोई कर्मी भी तो गिरोह से नहीं मिला है।

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