स्मृति शेष: सुषमा स्वराज याद रहेंगी अद्भुत भाषण शैली के लिए , 6 राज्यों से रहा है सियासी नाता

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Sushma Swaraj passes away: पूर्व विदेश मंत्री एवं भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का मंगलवार रात निधन हो गया। वह 67 वर्ष की थीं। सुषमा स्वराज न सिर्फ ट्विटर पर मदद के लिए जानी जाती थीं, बल्कि वह अपनी भाषा शैली के लिए भी लोगों में प्रिय थीं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में बतौर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने महज ट्वीट के जरिए जिस तरह से देश-विदेश में रहने वाले भारतीयों की मदद की, वह शायद ही किसी अन्य नेता में देखने को मिले। बीजेपी की कद्दावर नेता रहीं सुषमा की शालीनता, सक्रियता और भाषण शैली उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाती थी। सुषमा स्वराज का नाता सिर्फ एक राज्य से नहीं रहा, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से भी रहा। यूं कहा जाए कि अपने राजनीतिक करियर यूपी, दिल्ली समेत करीब 6 राज्यों की राजनीति में सक्रिय रहीं। बता दें कि सुषमा स्वराज के निधन पर राष्ट्रपति कोविंद, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।

सुषमा स्वराज की भाषण शैली और वाक्पटुता का कोई जोर नहीं था। जब वह बोलती थीं तो विपक्ष भी सन्न रह जाता था। उनके जवाब ऐसे होते थे, कि उसके काट के लिए विरोधी को सोचना पड़ता था। जब वह मनमोहन सरकार में विपक्ष की नेता थीं, तब उनका लोकसभा में भाषण काफी लोकप्रिय हुआ था। उन्होंने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के लिए शायराना अंदाज में तंज कसा था और कहा था- ‘तू इधर-उधर की बात न कर, ये बता कि काफिला क्यों लुटा? मुझे रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है।’

सुषमा स्वराज की भाषण शैली कितनी शानदार थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान को लताड़ा था। आतंकवाद के मुद्दे पर यूएन में बोलते हुए सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को बेनकाब किया था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच उसकी फटकार लगाई थी। 29 सितंबर 2018 को सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान पर गरजते हुए कहा था कि हत्यारों का महिमामंडन करने वालों से भारत कैसे बात कर सकता है।

सुषमा स्वराज इसलिए भी याद रखी जाएंगी क्योंकि संयुक्त राष्ट्र में उन्होंने हिंदी भाषा में भारत का पक्ष रखा था। इसके अलावा संसद में राहुल गांधी को उन्होंने कई मौकों पर जिस तरह से जवाब दिया था, वह भी उन्हें अन्य नेताओं से अलग रखता है।

इन राज्यों में सक्रिय रहीं सुषमा स्वराज:

दिल्ली: 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में सुषमा दक्षिण दिल्ली से सांसद बनी थीं। इसके बाद 13 दिन की अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। 1998 में वे दोबारा अटलजी की सरकार में मंत्री बनीं, लेकिन इस्तीफा देकर दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।

उत्तर प्रदेश- उत्तराखंड : सुषमा स्वराज 2000 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुनी गई थीं। जब उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड अलग राज्य बना, तब बतौर राज्यसभा सदस्य वहां भी सक्रिय रहीं।

मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश से उनका खासा नाता रहा है, क्योंकि सुषमा स्वराज दो बारा विदिशा से चुनाव जीत चुकी हैं। साल 2009 और 2014 में विदिशा से लोकसभा चुनाव जीती थीं।

हरियाणा : सुषमा स्वराज ने सबसे पहला चुनाव 1977 में लड़ा। वे हरियाणा की अंबाला सीट से चुनाव जीतकर देश की सबसे युवा विधायक बनी थीं। महज 25 साल की उम्र में वह हरियाणा की देवीलाल सरकार में मंत्री भी बनी थीं।

कर्नाटक : सुषमा स्वराज सोनिया गांधी के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुकी हैं। साल 1999 में उन्होंने बेल्लारी लोकसभा सीट पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि, वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

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