स्क्रब टाइफस संक्रमण से बचने के जानिए तरीके, गाजियाबाद में हुई संक्रमण से पहली मौत

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गाजियाबाद के शास्त्रीनगर निवासी 57 वर्षीय महिला की मौत स्क्रब टाइफस नामक बीमारी से होने का मामला सामने आया है। महिला का इलाज कर रहे नेहरूनगर यशोदा अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मुदित मोहन के मुताबिक स्क्रब  टाइफस बीमारी एक तरह के कीड़े के काटने से फैलती है। यह बीमारी अभी तक उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में ही सीमित थी लेकिन पिछले चार सालों से इस बीमारी के मामले गाजियाबाद में भी सामने आ रहे हैं। इस बीमारी से गाजियाबाद में यह पहली मौत है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू से भी घातक है। अगर इस बीमारी में समय से मरीज को इलाज न मिले तो उसकी मौत हो जाती है।

शास्त्रीनगर के एसई-414 निवासी शोभा अग्रवाल (57) की तबीयत पांच सितंबर से बिगड़नी शुरू हो गई थी। उनके पति धीरज अग्रवाल ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने अपनी पत्नी को गार्गी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां से फायदा न होने पर नेहरूनगर यशोदा अस्पताल लेकर आए। यहां पर उनकी पत्नी को आईसीयू में तीन दिन तक रखा गया। तीसरे दिन उनकी हालत बिगड़ने लगी तो चिकित्सकों ने उन्हें वेंटीलेटर पर रखने की बात कही। वेंटीलेटर पर रखवाने से उन्होंने मना कर दिया और अपने मरीज को दिल्ली रेफर करने की मांग की। रेफर करने के बाद यशोदा अस्पताल की रिपोर्ट उन्हें मिली,जिसमें स्क्रब  टाइफस बीमारी की पुष्टि हुई थी। इसके बाद वह दिल्ली के मैक्स अस्पताल लेकर गए। वहां पर जांचों के बाद ही उनकी मौत 12 सितंबर को हो गई। वहां की रिपोर्ट में भी स्क्रब  टाइफस बीमारी की ही पुष्टि हुई थी।

कीड़े से होती है यह बीमारी
नेहरूनगर के यशोदा अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मुदित मोहन ने बताया कि महिला को बेहद गंभीर हालत में यहां पर लाया गया था। उनकी जांच रिपोर्ट में स्क्रब  टाइफस बीमारी की पुष्टि हुई थी। यह बीमारी एक तरह के कीड़े के काटने से होती है। समय से इलाज न मिलने पर मरीज की मौत हो जाती है क्योंकि इस बीमारी का संक्रमण मरीज के शरीर के सभी अंगों को खराब कर देता है।

डेंगू और स्वाइन फ्लू से भी घातक
स्क्रब  टाइफस बीमारी डेंगू और स्वाइन फ्लू से भी घातक है। स्क्रब टायफस के मरीज ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में पाए जाते हैं। स्क्रब टाइफस एक जीवाणुजनित संक्रमण ह,ै जो लोगों की मौत की बड़ी वजह बनता है, जिसके लक्षण कुछ-कुछ चिकनगुनिया जैसे ही होते हैं। यदि किसी भी व्यक्ति में रोग के लक्षण पाए जाते हैं तो उसे जल्द से जल्द डॉक्टर की परामर्श लेनी चाहिए, जिससे सही समय पर इलाज शुरू कर रोगी की जान को बचाया जा सके।

इस तरह करें बचाव
पार्क या पेड़-पौधों के बीच जाने से पहले पूरी बाजू के कपड़े पहनें। बुखार तीन-चार दिनों से ज्यादा हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। घर के अंदर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें। इस बीमारी से बचने के लिए आस-पास के क्षेत्र, घर और अपने शरीर की साफ-सफाई का ध्यान दें। यह बीमारी चूहों में एक कीड़ा होता है, जिससे फैलती है, इसलिए घर में जितना हो सके चूहों के प्रवेश होने पर रोक लगाएं।

इन लक्षणों को पहचानें
-सांस लेने में परेशानी
-पीलिया
-उल्टी
-जी मचलाना
-जोड़ों में दर्द
-कंपकंपी के साथ बुखार होता है.
-गर्दन में दर्द
-कुल्हों के ऊपर गिल्टियां हो जाती हैं।
-इसके साथ शरीर के जिस हिस्से पर कीड़े ने काटा होता है वहां पर लाल रंग का एक निशान पड़ जाता है।

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