पडरौना, कुशीनगर : कुशीनगर में बच्चों से भरी स्कूली वैन के ट्रेन से टकराने से 13 मासूमों की जान चली गई तो वहीं दूसरी तरफ देश की राजधानी दिल्ली में भी एक अन्य हादसे में एक स्कूली बच्ची की मौत हो गई।। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर हमारे बच्चे स्कूल जाते वक्त कितने सुरक्षित हैं। क्या बच्चों को स्कूल ले जाने वाले वाहनों के लिए कोई दिशा निर्देश हैं कि नहीं? तो आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इन वाहनों के लिए दिशा-निर्देशों की एक पूरी लिस्ट जारी की है, लेकिन वाहन इन निर्देशों को ताक पर रख बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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स्कूल बसों के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश
1- बसों के आगे-पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए।
2- स्कूली बसों में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की व्यवस्था होनी चाहिए।
3- प्रत्येक बस में आग बुझाने के उपकरण होने चाहिए।
4- अगर किसी एजेंसी से बस अनुबंध पर ली गई है, तो उस पर ‘ऑन स्कूल ड्यूटी’ लिखा होनी चाहिए।
5- बसों में सीट क्षमता से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए।
6- प्रत्येक स्कूल वाहन में हॉरिजेंटल ग्रिल (जालियां) लगे हों।
7- स्कूल वाहन पीले रंग का हो, जिसके बीच में नीले रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
8- बसों के दरवाजे को अंदर से बंद करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
9- बस में सीटे के नीचे बैग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।
10- बसों में टीचर जरुर होने चाहिए, जो बच्चों पर नजर रखें।
11- प्रत्येक बस चालक को कम से कम 5 साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव हो।
12- किसी भी ड्राइवर को रखने से पहले उसका सत्यापन जरूरी है। एक बस में कम से कम दो चालक होने चाहिए।
13- चालक का कोई चालान नहीं होना चाहिए और न ही उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज हो।
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