सीएम योगी आदित्यनाथ करेंगे मंत्रिमंडल का विस्तार, मंत्रियों को लखनऊ बुलाया

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल के प्रस्तावित विस्तार में लगातार संकेत मिल रहे हैं कि परफॉर्मेंस के हिसाब से कई मंत्रियों की छुट्टी तय है, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्रिमंडल में दस  जुझारू और साफ छवि के नए चेहरे जुड़ सकते हैं।  वेस्ट यूपी में इस वक्त सहारनपुर से धर्म सिंह सैनी, शामली से सुरेश राणा, गाजियाबाद से अतुल गर्ग, अमरोहा से चेतन चौहान, मुरादाबाद से भूपेंद्र सिंह मंत्री हैं।

एक मंत्री एसपीएस बघेल थे, सांसद बनने के बाद वह मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। बताया जा रहा है कि सोमवार को योगी ने अपने सारे मंत्रियों को लखनऊ में बुलाया है और उन्हें यहीं रुकने को कहा है। योगी के इस निर्देश के बाद सोमवार को ही मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। अभी योगी सरकार में 20 कैबिनेट मंत्री, 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 13 राज्यमंत्री हैं।

संभावित विस्तार के बाद कुछ स्वतं‌त्र प्रभार वाले मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है तो कुछ को हटाया जा सकता है। कहा जा रहा है कि यूपी बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। पार्टी के एक व्यक्ति एक पद सिद्धांत के तहत स्वतंत्र देव सिंह को मंत्री पद से इस्तीफा देना था। बताया जा रहा है कि उनके इस्तीफे के बाद उनका मंत्री पद भी किसी और को दिया जाना है।

इसके अलावा नौ अन्य चेहरे भी मंत्रिमंडल में शामिल होने हैं।चर्चा है कि योगी सरकार के मंत्रियों को लखनऊ में रुकने को कहा गया है। बता दें कि शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को दिल्ली बुलाया था। देर शाम अमित शाह के साथ दोनों नेताओं की बैठक हुई।

सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर नामों पर चर्चा हुई। सीएम योगी आदित्यनाथ को विस्तार के लिए दिन तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि मौजूदा मंत्रिमंडल में 4 से 6 मं‌त्री हटाए जा सकते हैं। जिन मंत्रियों की परफॉर्मेंस सबसे ज्यादा खराब है, उनका हटना तय है।

सूत्रों का कहना है कि सबसे ज्यादा दिक्कत उन मं‌त्रियों के नामों को लेकर हो रही थी, जिन्हें मंत्रिमंडल से ड्रॉप किया जाना है। काफी कवायद के बाद 4 से 6 नामों पर सहमति बन गई है। ये नाम बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी बता दिए गए हैं। इन मंत्रियों के नाम परफॉर्मेंस के आधार पर तय किए गए हैं।

इनमें लोकसभा चुनाव हार चुके एक मंत्री का नाम भी शामिल है। उन पर आरोप है कि वह खुद चुनाव ढंग से नहीं लड़े। कुछ विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतें सीधे सीएम को मिली थीं। कुछ विभागों में तबादलों में भी लेन-देन की शिकायतें रोज सीएम दफ्तर तक पहुंच रही थीं। इसके बाद सीएम ने कुछ विभागों के तबादलों पर रोक भी लगा दी थी।

सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ विभागों के मंत्री हट सकते हैं और कुछ के विभाग बदले जा सकते हैं। पहले यह माना जा रहा था कि मंत्रिमंडल विस्तार मिलते-जुलते विभागों के एकीकरण के बाद किया जाएगा, पर वह प्रक्रिया अभी पूरी ही नहीं हुई है। इस वजह से मौजूदा विभागों के स्वरूप में ही मंत्रियों के विभाग बदले जाएंगे।

मंत्रिमंडल विस्तार में 8-12 नए चेहरों को जगह मिल सकती है। 19 मार्च, 2017 को जब मंत्रियों ने शपथ ली थी, उस वक्त सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा 24 कैबिनेट मंत्री, 9 स्वतंत्र प्रभार और 13 राज्यमंत्री भी शामिल थे। कुल 46 मंत्रियों ने शपथ ली थी, जबकि मंत्रियों की संख्या 60 तक हो सकती है। इनमें तीन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, एसपी सिंह बघेल और सत्यदेव पचौरी ने लोकसभा चुनाव जीतने के बाद इस्तीफा दे दिया था।

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर को भी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद 20 कैबिनेट मंत्री, 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 13 राज्यमंत्री बचे हैं। कुछ स्वतं‌त्र प्रभार वाले मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है तो कुछ को हटाया जा सकता है। इनमें ग्राम्य विकास मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी, होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर के नाम शामिल हैं। इनके अलावा संगठन से भी कुछ एमएलसी महामंत्रियों को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है।

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