सरकारी बैंकों में पड़े ताले, एक हजार करोड़ की क्लियरेंस फंसी

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लखनऊ। शहर के सभी सरकारी बैंकों के 734 शाखाओं में ताले लटके रहे। भारतीय बैंक संघ के दो फीसदी वेतन बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव से बिफरे बैंक संगठनों ने यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के बैनर तले हड़ताल का आह्वान किया है। यह हड़ताल गुरुवार को भी जारी रहेगी। हड़ताली बैंककर्मियों की वजह से शहर में लगभग एक हजार करोड़ रुपये के ड्राफ्ट की क्लियरेंस फंस गई। यही नहीं ऑनलाइन बैंकिंग भी नेटवर्क की समस्या के कारण ग्राहकों को पूरे दिन रूलाता रहा।

भारतीय बैंक संघ के प्रस्ताव से नाराज बैंक कर्मियों ने अपनी-अपनी शाखाओं पर सुबह से ही कार्यालय में ताला जड़कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। बैंक कर्मचारियों ने प्रबंधन और केन्द्र सरकार के रवैये से नाराजगी जताई तथा इनके खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। इसमें गोमतीनगर स्थित बैंक आफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, वहीं डालीगंज में इंडियन ओवरसीज बैंक, आलमबाग के भारतीय स्टेट बैंक शाखा समेत अन्य बैंकों में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।

हजरतगंज स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक का क्षेत्रीय कार्यालय और अशोक मार्ग व चन्द्रभानु स्मारक में स्थित मुख्य कार्यालय खुले होने की सूचना पर एनसीबीई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीके सेंगर और आल इंडिया ओवरसीज बैंक एम्पलाईज यूनियन के उपाध्यक्ष यूपी दुबे के नेतृत्व में पहुंचे कर्मचारियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। काफी संख्या में बैंककर्मियों के पहुंचने से प्रबंधन ने दबाव में दोनों कार्यालय बंद करा दिया। इसके बाद इन दोनों कार्यालयों पर कर्मचारियों ने प्रबंधन व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हजरतगंज स्थित भारतीय स्टेट बैंक मुख्यालय के परिसर में हड़ताली बैंककर्मियों के प्रदर्शन पर प्रबंधन ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए परिसर के अन्दर कोई भी गतिविधियां करने से साफ मना कर दिया। इसके बाद एनसीबीई के प्रदेश महामंत्री केके सिंह ने मुख्यालय के मेन गेट पर ताला डालकर हड़ताल का बैनर टंगवा दिया। ऐसे में बैंक के आला अधिकारी बैंक के परिसर में प्रवेश नहीं कर पाए। कर्मचारियों की काफी मानमनौव्वल के बाद संगठन नेता केके सिंह ने शर्त के साथ केवल छह डीजीएम को बिना गाड़ी के अन्दर प्रवेश करने में सहमति जताई। इससे काफी संख्या में कर्मचारी व अधिकारी बैंक के अन्दर नहीं पहुंच पाए।

मुख्यालय के सामने सड़क पर ही बैंक हड़ताली कर्मचारियों ने दोपहर 12 बजे के आसपास धरना देना शुरू कर दिया। आनन-फानन मंच बनाकर कर्मचारी नेताओं ने भाषणबाजी भीशुरू कर दी। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स के प्रांतीय संयोजक वाईके अरोड़ा ने कहा कि इस हड़ताल और लोगों की परेशानी के लिए कर्मचारी नहीं बल्कि बैंकों का उच्च प्रबंधन और केन्द्र सरकार जिम्मेदार है। एसबीआईएसए के मंडल महामंत्री केके सिंह ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर के लगभग 10 लाख कर्मचारी पांच वर्ष बाद अपने वेतन में सम्मानजनक बढ़ोत्तरी की आस लगाए हुए थे। लेकिन भारतीय बैंक संघ ने दो फीसदी वेतनवृद्धि का प्रस्ताव देकर मजाक किया है।

सभा को एसके संगतानी, वीके सेंगर, यूपी दुबे, दीप बाजपेई, दिलीप चैहान, अखिलेश मोहन समेत अन्य कर्मचारी नेताओं ने भी संबोधित किया। बैंक हड़ताली कर्मचारियों के निशाने पर प्राइवेट बैंकों की शाखाएं रहीं। क्योंकि प्राइवेट बैंकों ने इस हड़ताल का समर्थन नहीं किया है। ऐसे में हजरतगंज में एकत्र हो रहे हड़ताली कर्मचारियों ने वहां की एचडीएफसी और आईडीबीआई की शाखाओं पर धावा बोलकर बंद कराने की कोशिश की। इसके बाद एहतियातन दोनों बैंकों के प्रबंधन ने शाखाओं के शटर गिरा दिए। वहीं बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ यूनियन (यूपी उत्तराखण्ड) महामंत्री वीके सेंगर ने कहा कि गुरुवार को प्राइवेट के सभी शाखाओं को बंद कराने की अपील करने के लिए शहरभर में कई टोलियां घूमेंगी। बैंक हड़ताल का एटीएम पर कोई असर नहीं पड़ा। शहर के ज्यादातर एटीएम से सामान्य दिनों की तरह पैसा निकलता रहा। हड़ताल के दूसरे दिन यानि गुरुवार को भी एटीएम में कैश की कोई कमी न रहे प्रबंधन ने इसकी चाकचैबंद व्यवस्था की है। बैंक प्रबंधन ने एटीएम में कैश डालने वाली एजेंसियों से विशेष अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।

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