आजमगढ़ । जिले में लॉक डाउन (Lock Down) के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसरा है लेकिन जमाखोरी और आवश्यक वस्तुओं की मनमानी कीमत वसूली जा रही है । मुख्यमंत्री के जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई के निेर्देशों के बाद भी प्रशासन का इस पर कोई नियंत्रण नहीं दिख रहा। परिणाम ये है कि सब्जी मंडी में सैकड़ों की भीड़ जुट रही है। जिसके कारण संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। उधर दुकानदार बाहर से माल न आने का रोना रो रहे हैं जबकि स्थानीय किसानों की सब्जी भी औने-पौने दाम पर खरीदकर दस गुना कीमत पर बेच रहे हैं। कुल मिलाकर लॉक डाउन को ये खुद को मालामाल बनाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए आजमगढ़ में 25 मार्च तक लॉक डाउन किया गया है, जिसे अब यूपी सरकार ने 27 मार्च तक बढ़ा दिया है। आवश्यक वस्तुओं को छोड़ बाकि दुकानों को 31 मार्च तक बंद करा दिया गया है। सब्जी, फल, दूध, मेडिसिन, किराना आदि की दुकानें खुली हुई हैं. लॉक डाउन बढ़े न इसके लिए लोग जरूरी सामानों की अधिक से अधिक खरीदारी कर स्टोर कर रहे हैं। इसका पूरा फायदा कारोबारी उठा रहे हैं।
फुटकर में टमाटर 180 तो करैली 160 रुपए में बिक रहा
ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो यहां सब्जी फुटकर रेट में काफी महंगी हैं. आलू 16 से बढ़कर 25 रूपये प्रति किलो तो टमाटर 40 से बढ़कर 180 रूपये और हरी मिर्च 40 से बढ़कर 200 रूपये किलो बिक रही है. बैगन, 90, करैला 160, गोभी 45 रूपये किलों बिक रही है। इसी तरह किराना सामनों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई है। मेवा और फल का हाल अलग नहीं है। सब मिलाकर आवक कम होने के नाम पर खुलेआम लूट मची है।
थोक मंडी में कीमतें थोड़ी राहत भरी
खास बात है कि मंगलवार को मंडी में टमाटर 40 व हरी मिर्च 38 रूपये किलो बिका है। अन्य सब्जियों का दाम भी स्थिर नजर आया । इसके बाद भी महंगाई क्यों बढ़ रही है? पूछने वाला कोई नहीं है । मंडी में सब्जी सस्ती मिलेगी इसके लिए भोर से लोग यहां पहुंच जा रहे हैं। परिणाम है कि सैकड़ों की भीड़ जमा हो जा रही है। न तो किसी के हाथ में ग्लब्स है और न ही चेहरे पर मास्क. इससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। इतना ही नहीं मंडी में गंदगी का अंबार है।
Leave a Reply