विधायक हरिराम चेरो ने.! भाजपा के खिलाफ ताल ठोक दी!

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सोनभद्र । सियासी समर के बीच जिले में जारी अवैध खनन को लेकर अब भाजपा के सहयोगी दल अपना दल के दुद्धी विधायक हरिराम चेरो ने ही भाजपा खिलाफ ताल ठोंक दी है। दुद्धी तहसील क्षेत्र के खोखा खनन बालू साइट पर कई शिकायत, पुलिस और वन विभाग की रिपोर्ट के बाद कोई कार्रवाई ना होने से खफा विधायक ने लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार अभियान छेड़ने तक की चेतावनी दे डाली है ,खोखा बालू साइट पर मंगलवार को अवैध खनन की शिकायत की जांच करने गई टीम द्वारा पत्रकारों से दुर्व्यवहार और उनका मोबाइल छीन लेने और अवश्य क वीडियो फ़ोटो रिकॉर्डिंग डिलीट करने से पत्रकारो मेंआक्रोश के मसले पर विधायक ने कहा कि वह अवैध खनन के खिलाफ धरने पर भी बैठेंगे। उन्होंने कहा कि पीएम से लेकर सीएम तक अवैध खनन की शिकायत वन विभाग और पुलिस की रिपोर्ट में भी खोखा में अवैध खनन जारी होने की बात कही गई।

..लेकिन प्रदेश सरकार स्तर से संरक्षण होने के कारण अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई विधायक हरिराम चेरो का कहना था कि मंगलवार को जो टीम गई थी। उसके लिए उनकी शिकायत पर ही जांच के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने अवैध खनन के लिए सीधे सीएम योगी आदित्यनाथ को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि अब तक कार्रवाई ना होने से उन्हें लग रहा है कि खुद सीएम सोनभद्र में अवैध खनन को संरक्षण दे रहे हैं। अवैध खनन का यह मसला भाजपा के लिए इस बार के लोकसभा चुनाव में काफी भारी पड़ सकता है।

विधायक हरिराम ने अल्टीमेटम भरे लहजे में कहा कि 4 दिन के भीतर अगर प्रदेश सरकार और यहां का जिला प्रशासन मामले को गंभीरता से लेकर कार्यवाही नहीं करता है तो वह खुद यहां के राबर्टसगंज संसदीय सीट से आने वाले भाजपा उम्मीदवार को हराने का काम करेंगे। बताते चलें कि खोखा के साथ बरहमोरी बालू साइड को भी सत्ता पक्ष के लोगों द्वारा संरक्षण किए जाने के आरोप कई बार सार्वजनिक रूप से लगाए जा चुके हैं। इस साइड में भाजपा के चर्चित सांसद के बेटे के भी लिप्त होने की बात प्रकाश में आ चुकी है। वन विभाग द्वारा आपत्ति जताते हुए  यह साइट बंद कराई जा चुकी है।

इसी तरह जुगैल थाना क्षेत्र में बालू भंडारण लाइसेंस के नाम पर बड़े स्तर पर अवैध खनन और परिवहन का मामला सार्वजनिक हो चुका ह। जुगैल रेंजर इसके लिए पत्राचार कर चुके हैं। बावजूद अवैध खनन कराने वाले और इसे संरक्षण देने वालों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई अब तक अमल में नहीं लाई जा सकी है।

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