रौबदार एसओ नेबुआ को विवादों में रहना बेहद पसंद

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उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर। जिले के नेबुआ नौरंगिया के थानाध्यक्ष निर्भय नारायण सिंह का विवादों से गहरा नाता रहा है वह जहां भी जाते हैं विवाद उनके साथ ही रहते हैं या यूं कहें कि उनको विवादों में रहना पसंद है। बताते चलें कि वर्तमान में नेबुआ नौरंगिया एसओ जब तरयासुजान थाने में तैनात थे तब इनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ये बिहार बॉर्डर में घुस कर नशे में धुत होकर बारातियों से अवैध वसूली कर रहे थे उस समय जब वहां के स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो अपनी पिस्टल निकाल कर लहराने लगे और वर्दी का धौंस दिखाते हुए लोगों से हाथापाई करने लगे।

उसके बाद जब ये नेबुआ नौरंगिया थाने में आये तो यहां की जनता में अपनी पुरानी आदत अनुसार इतना खौफ पैदा कर दिया था कि जनता इसके पास जाने से डरती थी। अपराधों पर लगाम लगाने के बजाय यह अपराधियों को संरक्षण दे रहे थे तथा निर्दोषों को झूठमूठ का फंसा कर पैसा वसूलना इनक पेशा बन गया था। इनके आदतों से आजिज आकर जनता ने तत्कालीन विधायक विजय दुबे से इनकी शिकायत की लेकिन इस बेअन्दाज एसओ ने उनकी भी नहीं सुनी, हारकर विधायक श्री दुबे को निर्भय सिंह के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ा तब जाकर इसका ट्रांसफर नेबुआ से हुआ।

इतना सब होने के बाद भी यह रौबदार एसओ अपनी आदत से बाज नहीं आए जब इन्हें पटहेरवा थाने का इंचार्ज बनाया गया तो इन्होंने किसी मामले को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी आंद्रा वामसी से बात कहि व देखलेने की धमकी देते हुए उनके खिलाफ अपने थाने में तस्करा लिख दिया। इससे खार खाये डीएम वामसी ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद से इस घटना की शिकायत की तथा इस एसओ को पुलिस लाइन बुला लिया। अपराधियों को संरक्षण देना तथा निर्दोषों के साथ अन्याय करना और जनता में अपना खौफ बनाना निर्भय सिंह की पुरानी आदत है।

एसपी यमुना प्रसाद के स्थानांतरण के बाद जब वर्तमान एसपी अशोक पाण्डेय आये तो पटहेरवा थाने से पुलिस लाइन आये इस रौबदार दरोगा को एक बार पुनः नेबुआ नौरंगिया का प्रभार दे दिया गया, अब वर्तमान में नेबुआ थाने में तैनात निर्भय सिंह ने जनता के अंदर अपना खौफ इस तरह पैदा किया है कि गरीब और लाचार थाने में जाने से कतराते हैं। यह थानाध्यक्ष निसहाय लाचार फरियादियो से गाली के मुंह बात करते है। अभी हाल ही में कुछ दिन पहले इस एसओ द्वारा ‘एक साप्ताहिक पत्रिका जासूसी निगाहें के सम्पादक अलाउद्दीन को फर्जी तरीके से उठा कर थाने में उनके साथ मारपीट की गयी’ तथा उनको माँ बहन की गाली भी दी गयी।

इस सम्बंध में जब पत्रकारों ने हस्तक्षेप किया तब मामला बिगड़ता देखकर एसओ ने सम्पादक को छोड़ दिया। इस गालीबाज एसओ ने सम्पादक से यहां तक कहा कि ‘जब मैं डीएम को ठीक कर सकता हूँ तो तुम्हारी क्या औकात है’। इस रौबदार एसओ का एक ताजा मामला भी सामने आया है, इसी थाने के अंतर्गत पड़ने वाले एक गांव की एक नाबालिग लड़की को पडरौना कोतवाली थानान्तर्गत जगदीशपुर गांव का एक मुस्लिम कौम का लड़का बहला फुसलाकर भगा ले गया है।

सूत्रों के अनुसार इस सम्बन्ध में लड़के को तो पुलिस ने उठाया है लेकिन थाने में उसकी खातिरदारी मेहमानों के जैसे हो रही है और भगाने के 19 दिन बाद भी अभीतक लड़की की बरामदगी पुलिस सुनिश्चित नहीं कर पायी है। इस दौरान एक दिन जब लड़की के पिता थाने पर जाकर इस सम्बंध में हो रही कार्यवाही के बारे में जानना चाहे तो गालीबाज थानाध्यक्ष ने उन्हें माँ बहन की गाली देकर भगा दिया।

नेबुआ नौरंगिया पुलिस का तर्क है कि अक्सर लोग तहरीर में बढ़ा-चढ़ाकर आरोप लगाते हैं। मसलन मारपीट हुई तो जेब से रुपये छीन लेने, जान से मारने की धमकी देने व छेड़छाड़ जैसी बातें अपनी तरफ से जोड़ देते हैं। यही हाल चोरी के मामलों में होता है। कई बार तो पारिवारिक विवाद के बीच चोरी जैसी घटना की झूठी कहानी गढ़ ली जाती है। विवेचना में ऐसे कई मामले सामने आते रहते हैं।
*नहीं लगता है एसओ नेबुआ का फोन*
जब थानाध्यक्ष नेबुआ का फोन लगाया जाता है तो हमेशा नॉट रिचेबल या स्विच ऑफ रहता है। जिससे कि उनसे किसी प्रकार की कोई बात फोन द्वारा नहीं हो पाती है।

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