राज्यसभा चुनाव में पल-पल बदल रहे है समीकरण, जानिये किस पार्टी का पलड़ा है भारी !

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लखनऊ/दिल्ली। यूपी में राज्यसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू है। यूपी में एक सीट का पेंच ऐसा फॅसा है कि इसमें सत्तारूढ़ भाजपा तो उलझा हुआ है। बसपा इसे अपनी प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए खोना नही चाहती। उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए सरगर्मी तेज हो गई है। यहां इस बार कुल 10 उम्मीदवार राज्यसभा पहुंचने वाले हैं। इसमें से 8 सीटों पर भाजपा की जबकि एक पर समाजवादी पार्टी की जीत पक्की है। यूपी की 10वीं सीट पर सबसे बड़ा पेंच फंसा हुआ है। इस सीट पर सपा और कांग्रेस जहां बसपा को जिताने में जुटी हैं, वहीं भाजपा ने भी 9वें उम्मीदवार को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

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मगर भाजपा सभी का खेल बिगाड़ने की कोशिश करते हुए 9वें उम्मीदवार के तौर पर बिजनेसमैन अनिल कुमार अग्रवाल को राज्यसभा भेजने की जुगत में है। समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता नरेश अग्रवाल के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने से इस बात की चर्चा है कि उनका बेटा और सपा विधायक नितिन भाजपा के पक्ष में वोट कर सकता है। हरदोई सदर से विधायक नितिन ने हाल ही में योगी आदित्यनाथ द्वारा बुलाई गई भाजपा और उसके सहयोगियों की बैठक में शिरकत की थी।

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भारतीय जनता पार्टी
लोकसभा उपचुनाव में अतिआत्मविश्वास का शिकार होकर ठोकर खा चुकी भाजपा अब खूब फूंक फूंक कर कदम रख रही है। पार्टी के लिए सामने अपना नौवां प्रत्याशी जिताने की चुनौती है। यह चुनौती विपक्ष की ओर से है। 10वीं सीट के लिए यह चुनाव इतना फंसा हुआ नहीं होता अगर नरेश अग्रवाल ने पाला नहीं बदला होता। दरअसल यूपी में राज्यसभा चुनावों की गणित के मुताबिक एक कैंडिडेट को जीत के लिए 37 विधायकों के मतों की जरूरत है। भाजपा के पास 311 और सहयोगियों अपना दल एस (9) व सुभासभा (4) को मिलाकर एनडीए के कुल 324 विधायक हो रहे हैं। वहीं सपा के पास 47, बसपा के 19, कांग्रेस के 7, आरएलडी के 1, निषाद के 3 और निर्दलीय तीन विधायक हैं।

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कांग्रेस पार्टी
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी को पर्यवेक्षक बनाया है। तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर बुधवार को लखनऊ पहुंच गए हैं। राजबब्बर ने कहा कि वह राज्यसभा चुनाव के लिए लखनऊ आए हैं और यहीं रूकेंगे। वहीं, प्रमोद तिवारी ने बताया कि राज्यसभा सदस्य डा. संजय सिंह और पी.एल. पुनिया भी कल लखनऊ आ जायेंगे। तिवारी और कांग्रेस विधानमण्डल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने भी अपने विधायकों के साथ बैठक की। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं और राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर के पक्ष में वोट करेंगे।

बहुजन समाजवादी पार्टी
बसपा ने भीमराव अंबेडकर को अपना राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। बसपा के पास राज्य में 19 विधायक हैं। उसे उम्मीदवार को जिताने के लिए 19 और विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के सात और राष्ट्रीय लोक दल के एक विधायक का समर्थन मिलने से मायावती की पार्टी एक उम्मीदवार को जिता सकती है।

समाजवादी पार्टी
समाजवादी पार्टी के पास प्रदेश में 47 विधायक हैं। वह जया बच्चन को संसद के ऊपरी सदन में भेज रही है। उसके पास 10 एक्स्ट्रा वोट हैं। जिसे वह बसपा के उम्मीदवार को दे सकती है। सपा के वरिष्ठ नेता और विधायक पारसनाथ यादव ने कहा कि हम जानते हैं चुनाव कैसे लड़ा जाता है। हमारा उम्मीदवार जीतेगा और हम इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि बसपा के उम्मीदवार की भी जीत हो।

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