[object Promise]
हरदोई ।
सरकारी अधिकारियों की उदासीनता के चलते दूर-दराज से आए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मिलने के लिए रजाई गद्दा लेकर जिला अधिकारी कार्यालय के पास डेरा डाल दिया। उनका कहना है कि 70 किलोमीटर से आने में बहुत देर हो जाती और वह जिलाधिकारी के जनता दरबार में अपनी समस्या ना कह पाते।विडंबना है कि सरकारी मशीनरी की इस उदासीनता के चलते ग्रामीणों को परेशान होना पड़ता है जबकि प्रशासन स्तर पर समाधान,थाना दिवस आदि लगाए जाते हैं। यहां तक कि जिलाधिकारी के आदेशों को भी अधीनस्थ अधिकारी तवज्जो ना
देकर मनमानी से काम करते हैं और इसी का दुष्परिणाम है कि ग्रामीणों को अपनी समस्याएं लेकर जिला कार्यालय आना पड़ता है।
सरकारी अधिकारियों की उदासीनता के चलते दूर-दराज से आए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मिलने के लिए रजाई गद्दा लेकर जिला अधिकारी कार्यालय के पास डेरा डाल दिया। उनका कहना है कि 70 किलोमीटर से आने में बहुत देर हो जाती और वह जिलाधिकारी के जनता दरबार में अपनी समस्या ना कह पाते।विडंबना है कि सरकारी मशीनरी की इस उदासीनता के चलते ग्रामीणों को परेशान होना पड़ता है जबकि प्रशासन स्तर पर समाधान,थाना दिवस आदि लगाए जाते हैं। यहां तक कि जिलाधिकारी के आदेशों को भी अधीनस्थ अधिकारी तवज्जो ना
देकर मनमानी से काम करते हैं और इसी का दुष्परिणाम है कि ग्रामीणों को अपनी समस्याएं लेकर जिला कार्यालय आना पड़ता है।
मालूम हो कि जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर जिले के विकासखंड टोडरपुर इलाके के करसुआग्रंट गांव का यह मामला, जहां 4 माह पूर्व ग्रामीणों को राशन न बांटने की शिकायत पर कोटेदार विनीता के पास से गांव का कोटा निरस्त कर दिया गया था और राशन कोटा 8 किमी दूर स्थित गांव नगरिया के कोटेदार के पास अटैच कर दिया गया था।जिसके बाद पिछले 4 महीने में तीन बार कोटा चयन के लिए विकासखंड टोडरपुर के जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के द्वारा तारीख निश्चित की गई। गांव में लोग इकट्ठा भी हुए लेकिन सरकारी अधिकारियों ने कभी बीमारी का हवाला देकर तो कभी समय का हवाला देकर चुनाव नहीं कराया। ग्रामीणों के मुताबिक, इस दौरान गांव के लोगों को राशन लेने के लिए 8 किलोमीटर दूर स्थित नगरिया गांव जाना पड़ता है जिससे 3500 सौ की आबादी वाले इस गांव में लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इस बारे में ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अधिकारियों की उदासीनता के चलते उनके गांव के कोटे का चयन नहीं हो पा रहा है और इसके लिए उनके गांव के लोगों को काफी तकलीफ उठानी पड़ रही है। लिहाजा आज वह लोग रात में ही रजाई गद्दे लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में रुके हैं और सुबह जिलाधिकारी से मिलकर ही वापस जाएंगे क्योंकि अगर वह लोग सुबह आते तो 70 किलोमीटर दूर से यहां आते तो जनता मिलन के समय के बाद पहुंचते। लिहाजा जिलाधिकारी से उनकी मुलाकात होना मुश्किल था। ग्रामीणों की माने तो वह लोग जिलाधिकारी से मिलकर जाएंगे और अगर उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो इसके लिए वह लोग भूख हड़ताल पर भी बैठने को तैयार हैं।
बहरहाल हाल, जिलाधिकारी सुबह ग्रामीणों से मिले। जिला अधिकारी ने बताया कि जिम्मेदार नहीं गए। उनके खिलाफ स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह की तारीख दे दी गई है ।ग्रामीण लोग तहसील दिवस में भी मिले थे उनकी समस्या हल हो जाएगी।
Leave a Reply