यूपी निकाय चुनाव में दावेदारी के बावजूद बीजेपी ने नहीं दिया राष्ट्रपति के परिवार को टिकट

यूपी निकाय चुनाव में दावेदारी के बावजूद बीजेपी ने नहीं दिया राष्ट्रपति के परिवार को टिकट

 

 

कानपुर। उत्तर प्रदेश में इस महीने के आखिरी में नगर निगम के चुनाव होने हैं। जहां इस चुनाव में योगी आदित्यनाथ की परीक्षा है तो वहीं सपा, बीएसपी और कांग्रेस के लिए राज्य में दोबारा स्थापित होने का एक मौका भी है। वहीं इस चुनाव में झींझक नगर पालिका काफी सुर्खिया बटोर रही है। यहां के अध्यक्ष पद के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के परिवार ने आवेदन दायर किया था, जिसे बीजेपी ने अस्वीकार कर दिया है। दावेदरी पेश कर रही रहीं राष्ट्रपति की भाभी विद्यावती कोविंद और रिश्तेदार दीपमाला वर्मा ने खुद को चुनाव मैदान से बीजेपी के निर्णय के बाद दूर कर लिया है। जबकि भतीजा और बहु ने जनता के निर्णय को सर्वोपरि रखते हुए चुनाव लड़ने के लिए अपनी दावेदारी बरकरार रखी है।

आपको बता दें कि चुनावों के मद्देनजर बीजेपी ने जनपद के सभी नौ निकायों पर अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। इसमें झींझक नगर पालिका सीट पर अध्यक्ष पद के लिए शिवकुमार कोरी की पत्नी सरोजदेवी को अपना प्रत्याशी बनाया है। बता दें कि इस अध्यक्ष पद के लिए राष्ट्रपति की भाभी विद्यावती कोविंद, भतीजा बहु दीपा कोविंद और रिश्तेदार दीपमाला वर्मा ने आवेदन दायर किया था। प्रत्याशी घोषित होने के बाद पार्टी के निर्णय को मानते हुए विद्यावती और दीपमाला तो चुनाव से दूर हो गए हैं, लेकिन कोविंद की भतीजा बहु अभी चुनाव लड़ने की मशा लिए बैठी है। दीपमाला के ससुर अशोक कुलश्रेष्ठ का कहना है कि अगर पार्टी चुनाव चिन्ह देती तो बहु को चुनाव लड़ाते,लेकिन अब हम पार्टी के फैसले के साथ है।

 

विद्यावती ने कहा कि वे संगठन के निर्णय के साथ हैं। वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति के भाई प्यारेलाल की बहू दीपा ने चुनाव को जनता का आदेश मानते हुए खुद को निर्दलीय दावेदार के रूप में पेश किया है। दीपा के देवर दीपक के अनुसार झींझक की जनता के आग्रह पर भाभी चुनाव मैदान में आई हैं। पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो क्या लोगों का आग्रह है, इसलिए चुनाव में निर्दलीय के रूप में भाभी का गुरुवार 9 नवंबर को नामांकन कराएंगे।





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