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पडरौना,कुशीनगर : रमजान महीना आज से शुरू हो गया है,इस महिने में मुसलमान रोजा रखते हैं। इसमें सूर्योदय होने से सूर्य अस्त होने तक कुछ खाया और पीया नहीं जाता।
रोजे सुबह सहरी के साथ रखा जाता है और इफ्तार के साथ खत्म कर दिया जाता है। कहा जाता है कि पाक महीने में ही कुरान-ए-पाक नाजिल हुआ था और हर बालिग मुसलमान पर 30 दिन रोज़े रखना फर्ज़ है।
इस्लामिक मान्यता के मुताबिक रमजान के महीने में अल्लाह लोगों पर मेहरबान होते हैं और रहमतों की बारिश करते हैं। ये भी मान्यता है कि इस महीने में फर्ज नमाजों का सवाब 70 गुणा बढ़ जाता है।
माना जाता है कि रमजान का महीना आते ही जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। रमजान का महीना खत्म होने के बाद ईद का पर्व मनाया जाता है।
बताते चले कि मंगलवार के दिन से शुरू हुए रमजान के महीने का पहला रोजा था। पहला रोजा का इफ्तार करने का समय 6:39 पर रहा। इस पर्व के मौके पर रोजेदारों ने सुरक्षा,बिजली-पानी और सफाई की व्यवस्था करने की मांग की है।
रमजान शुरू होते ही रोजेदारों की भीड़ से पडरौना कुशीनगर में बाजार गुलजार हैं और दुकानें सज गई हैं। सहरी और इफ्तार के लिए देर तक दुकानें खुलने लगी हैं। फेनी,सेवई, खजूर, खजला आदि की दुकानों पर शाम होते ही लोग जुट रहे हैं। सहरी के लिए फैनी,सेवईं, खजला और रस्क तो वहीं इफ्तार के लिए अलग-अलग किस्म के खजूर बाजारों में मौजूद हैं। खजूर से रोज़ा खोलना सुन्नत माना गया है।
रमजान की शुरुआत के साथ ही रिश्तेदारों और करीबियों को मुबारकबाद देने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। लोग मैसेज और सोशल साइट्स के जरिए एक-दूसरे को माह-ए-रमजान की दुआएं भेज रहे हैं।
मंगलवार को पहले रोजे के इफ्तार के बाद अकीदतमंद पडरौना शहर में सड़कों पर निकले।
रमजान को रहमतो और बरकतों का महीना कहा जाता है। इस माह को कुरान शरीफ के नाजिल का महीना भी माना जाता है। पडरौना शहर से लेकर देहात तक बाजारों की रौनक बढ़ गई है।
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