मासूम से लेकर बुजुर्ग तक होते है खूंखार कुत्तों के शिकार

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उपेन्द्र कुशवाहा

पडरौना,कुशीनगर : कुशीनगर मे खूंखार कुत्ते सिर्फ देहात में ही नहीं पडरौना शहर में भी मासूमों को अपना शिकार बना रहे हैं। आवारा कुत्तों के आतंक के लोग रोज शिकार हो रहे हैं लेकिन नगरपालिका पडरौना के जिम्मेदार प्रभावी अंकुश को लेकर बेपरवाह नजर आ रहे हैं। नगरपालिका पिछले कई वर्षों से कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया है। नगरपालिका प्रशासन न तो कुत्तों का लाइसेंस जारी कर रहा है न ही उनका रिनीवल ही कर रहा है।

पडरौना शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों ने नागरिकों को परेशान कर रख दिया है। शहर के कसेरा टोली में दो दर्जन से अधिक कुत्ते हैं।
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कुत्तों का लाइसेंस भी नहीं दे रहा नगरपालिका पडरौना

घर में पालतू कुत्ते रखने के लिए नगरपालिका द्वारा लाइसेंस दिया जाता है। जो हर वर्ष अप्रैल माह में शुरू हो जाता है। पिछले कई वर्षों से लाइसेंस देने का काम नहीं हो रहा है। न तो कुत्ता पालने वाले नगरपालिका मे आ रहे हैं, न ही नगरपालिका के जिम्मेदार उन पर लाइसेंस के लिए कोई दबाव बना रहा है।
करीब 30 वर्ष पहले से त 5 रुपये लेकर पालतू कुत्तों का लाइसेंस जारी करने का नगरपालिका प्रशासन का नियम बना था। नगरपालिका कुत्ते के लिए पट्टा मुहैया कराता है, जिसे कुत्ते के गले में हमेशा पहनाए रखना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष के अप्रैल माह में इसका नवीनीकरण किया जाता है। लंबे समय से नवीनीकरण का कार्य भी ठप पड़ा हुआ है।
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ब्रीडिंग सीज़न के चलते हो रहीं हैं घटनाएं

पशु चिकित्सक डॉ.उदय सिंह  का कहना है कि कुत्ते एक झुंड में घूमते रहते हैं। आवारा कुत्ते मासूम बच्चों, बुजुर्ग और महिलाओं को सर्वाधिक शिकार बनाते हैं। गलियों में कूड़ा बीनने वाले, सफाई कर्मचारी, दाई इनके सहज शिकार होते हैं। ब्रीडिंग सीजन में कुत्ते में हार्मोन ज्यादा स्रावित होते हैं। जिससे उनके अंदर उत्प्रेरक बढ़ जाता है और वे खूंखार हो जाते हैं। सबसे आसान तरीका सड़क पर घूम रहे सभी आवारा कुत्तों को एन्टी रैबीज़ वैक्सीन लगा दिया जाए तो घटनाएं 99 फीसदी तक कम हो जाएंगी।
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सिर्फ कागजों में ही चल रहा है आवारा कुत्तों पर नजर  रखने का अभियान

कुत्तों के स्वभाव को नजर रखने वालों का कहना है कि झूंड में घूमने वाले कुत्तों को छेड़ा नहीं जाना चाहिए। पशु विभाग को कुत्तों का बंध्याकरण कराने के लिए बजट भी आता है लेकिन वह कागजों में अभियान चला रहे हैं।
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जिला अस्पताल में रोज पहुंच रहे हैं दो दर्जन से अधिक लोग

जिला अस्पताल में कुत्ता, बिल्ली, बंदर और सियार आदि के शिकार लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सिर्फ जिला अस्पताल में पिछले एक साल में 16 हजार से अधिक लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन लग चुकी है। इसके साथ ही शहर के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी एंटी रैबीज बैक्सीन लगाई जा रही है।
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कुत्तों को लेकर इस संदर्भ में प्रस्ताव बनाकर शासन को जल्द ही भेजा जायेगा। जिसमें जरुरी संसाधन और पशु चिकित्सक की मांग की जाएगी।

अध्यक्ष नगर पालिका परिषद पडरौना, बिनय जायसवाल

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