योगेंद्र गौतम
बीघापुर /उन्नाव (यूपी) । कश्मीर में मंगलवार को ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना के शिकार हुए सैनिक विपिन कुमार के पार्थिव शरीर को कोर प्रभारी प्रमोद कुमार पंडित सैनिक के गांव खेमईखेड़ा लेकर आए सैनिक के पार्थिव शरीर को देखने के लिए गांव में जनसमूह उमड़ पड़ा पूरे सैनिक सम्मान के साथ सैनिक के पार्थिव शरीर को सेना के आए हुए जवानों व पारिवारिक जनों ने गांव में ही चिता पर रखा परंतु मुखाग्नि देने के पहले ही आए हुए जन समूह में आक्रोश भड़क गया क्योंकि बीघापुर थाना पुलिस के अलावा कोई भी बड़ा नेता या बड़ा अधिकारी गांव नहीं पहुंचा था।
ग्रामीणों ने सैनिक की चिता में आग लगाने से इंकार कर दिया उन सभी का कहना था जब तक कोई जिले का बड़ा अधिकारी नहीं आएगा तब तक चिता को आग नहीं दी जाएगी।
जब यह चर्चा जिले पर पहुंची तो उन्नाव से तहसीलदार दशरथ कुमार गांव पहुंचे परंतु ग्रामीणों ने शोर शराबा शुरू कर दिया और तहसीलदार को गाड़ी से नीचे नहीं उतरने दिया ।उसी बीच क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र सिंह भी गांव पहुंच गए और परिजनों को समझाने का प्रयास करते रहे परंतु ग्रामीण अपनी बात पर अड़े रहे ग्रामीणों का कहना था कि अभी कुछ दिन पहले थाना क्षेत्र के गांव रावतपुर निवासी विजय कुमार भी कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे तब रावतपुर में जिले के सभी नेता और सभी अधिकारी मौजूद थे परंतु आज भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
बढ़ते आक्रोश को देखते हुए एडीएम वी एन यादव, एएसपी अष्ट भुजा प्रसाद सिंह , एसडीएम पूजा अग्निहोत्री आदि सैनिक के अंतिम संस्कार के लिए गाँव पहुँचे। एक सवाल के जवाब में एसडीएम बोलीं कि उन्हें सूचना ही नहीं थी सैनिक के शहादत की, वहीं एडीएम ने भी यही बात दोहराई, तो एक बार फिर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ा। किंतु किसी तरह आक्रोशित लोगों का गुस्सा सभ्रांत लोगों ने शांत कराया तो उसके बाद शहीद की चिता को मुखाग्नि शहीद विपिन कुमार के बड़े भाई किशोर ने दी । जिस स्थान पर शहीद की चिता लगाई गई वहां पर स्मारक बनाए जाने की बात शहीद के पिता केशव राम ने कही, यदि शाशन प्रशाशन की मदद से बने तो उसका सन्देश सकारात्मक होगा, अगर नहीं मदद करेगा तो मैं अपने स्तर से तो बनवाऊंगा ही। शहीद विपिन की पत्नी दीक्षा अपनी 10 माह की अबोध बच्ची को सीने से लगाये बस रोये जा रही थी। परिजन उसे संभालने का प्रयास करते रहे।
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