“मदद के बदले शारीरिक शोषण” क्या यही है मदद का अर्थ

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Chinmayanand case: बेटी किसी की भी हो, सबको प्यारी होती है। उसे जरा सी चोट लग जाए, बुखार आ जाए तो चिंता होती है। यह बेटी भी दिक्कत में आई तो पूरा परिवार एकसूत्र में बंध गया। डटकर मुकाबला किया। तमाम बातें हुईं, सब बर्दाश्त किया। ठीक है मदद ली, लेकिन उससे कोई अपना सम्मान थोड़े ही बेच जाता है। मजबूरियां रही होंगी, तभी तो इस बेटी ने ठान लिया। सजा दिलाएंगे। भले ही कुछ हो जाए। उसके लिए उसने बहुत कुछ सुना, बहुत कुछ सहा, खुद भी घिर गई, पर उसका हौसला तब भी बुलंद था और आज भी बुलंद हैं।

घर की बड़ी बेटी

घर की बड़ी बेटी है वह। संघर्ष भी किया और अब भी कर रही है। मुश्किल भरी जिंदगी में पढ़ लिखकर आगे बढ़ने के लिए कदम बढ़ाए। मां ने बहुत साथ दिया। सहेली जैसी मां से इस बेटी ने कभी कुछ नहीं छिपाया। बेटी और अन्य बच्चों के लिए उसकी मां भी संघर्ष करती रही। स्कूल में पढ़ाया। रोज सफर कर स्कूल जाना और आना सालों रहा। बच्चों की भी जिम्मेदारी खूब निभाई। मां की हिम्मत के बल पर छात्रा ने वकील बनने का सपना संजोया। इसके पीछे उसके पिता भी हैं, क्योंकि पिता का वकीलों के साथ काम करना भी बताया गया। बेटी वकील बनेगी, इसी सपने के साथ उसका दाखिला लॉ कालेज में कराया गया था।

फीस आदि का झंझट

फीस आदि का झंझट फंसा तो उसे चिन्मयानंद से मिलने के लिए कहा गया। शुरू में तो छात्रा की बहुत मदद की गई, लेकिन बाद में जब मदद के बदले चिन्मयानंद ने जो काम कराए, वह बहुत ही शर्मनाक हैं। छात्रा बताती है कि उसे धमका कर रखा जाता था। नौकरी आदि के बहाने उसे कालेज में ही रोका जाने लगा। सुबह मालिश आदि कराने के लिए जबरिया बुलाया जाता था। छात्रा अपने घर भी मर्जी से नहीं आ पाती थी। त्योहार हो तो भी उसे घर पर रहने की आजादी नहीं थी।

जिंदगी छात्रा की अधिकार चिन्मयानंद का

जिंदगी छात्रा की और उस पर अधिकार चिन्मयानंद का था। आखिर कब तक वह घुटती रहती। तब उसने यह सब संजय को बताया। छात्रा ने कहा कि वह चिन्मयानंद से सीधा मुकाबला तो नहीं कर सकती थी, इसलिए चश्मे वाला कैमरा मंगा कर उसने रिकार्डिंग करनी शुरू कर दी। इस बीच स्वामी ने भी वीडियो बना ली थी, जिसके जरिए वह छात्रा को ब्लैकमेल कर रहा था। यह सब हो रहा था। फिर एक दिन उसने अपने दोस्त को सब दिखाया। भंडाफोड़ कर चिन्मयानंद का असली चेहरा सबके सामने लाने की तैयारी की गई। पर यूपी में तो स्वामी का सिक्का चलता था,  इस वजह से ही छात्रा ने दूसरे प्रदेश जाकर पूरा मामला ओपन करने की ठानी।

ऐसे निकली चंगुल से

वह संजय के साथ निकल गई। उसके रिश्तेदारों से मिली। तय किया गया कि सोशल मीडिया को सहारा बनाया जाएगा। उसी के जरिए छात्रा ने अपना वीडियो जारी किया। इसके बाद तो भूचाल ही आ गया। सब हिल गए। पर छात्रा नहीं डगमगाई। उसने शुरू से ही ठान रखा था कि वह दूसरी लड़कियों को जरूर बचाएगी, इसलिए उसने अपनी परवाह नहीं की। राजस्थान में पुलिस ने उसे पकड़ा, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट का साथ मिला तो छात्रा की हिम्मत बढ़ गई। उसे लग गया कि अब सबकुछ ठीक होगा। वहां की एक वकील ने छात्रा को हौसला दिया, साथ दिया। हर कदम पर साथ रहीं। चिन्मयानंद और उनके लोगों के हर वार से बचाव कर छात्रा को तमाम मुसीबतों से बाहर निकाला।

छात्रा कार्रवाई से संतुष्ट नहीं

छात्रा तो अब भी कह रही है कि अभी चिन्मयानंद पर जो धाराएं लगाई गई हैं, वह मामूली हैं, वह बच जाएगा। जांच टीम पर भी सवाल खड़े कर दिए। खुद को रंगदारी मामले में आरोपी बनाए जाने पर भी छात्रा ने कहा कि यह तो साजिश की गई। खैर छात्रा ने कहा कि चिन्मयानंद अगर जेल में है तो उसके लिए पहला श्रेय मीडिया को जाता है। उसने कहा कि मीडिया ने उसकी लड़ाई में बहुत साथ दिया। छात्रा ने हर उस व्यक्ति को धन्यवाद दिया, जिसने पुतले फूंके, जिसने ज्ञापन दिए, जिसने सोशल मीडिया पर लिखा।

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