बरुआ गांव में आवास व शौचालय में हो रही धांधली ग्रामीणों ने लगाया आरोप

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बताते चलें की तेजतर्रार चायल विधायक संजय गुप्ता का गृह जनपद होने के बावजूद हो रहा है भ्रष्टाचार l सरसावा ब्लाक के बरुआ ग्राम सभा में किसी भी प्रकार का विकास कार्य न होने से गांव वालों में काफी आक्रोश व्याप्त है। ग्राम प्रधान ने पात्रों को नहीं दिया प्रधान‌मंत्री का आवास का लाभ ग्रामीण l उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का गृह जनपद होने के बावजूद भी नहीं थम रहा भ्रष्टाचार।

 

मीडिया पत्रकारों के सामने जाहिर किया और जमकर नारेबाजी की गांव में सड़क नाली शौचालय आवास मुक्त किसी भी प्रकार से कोई कार्य नहीं होने की वजह से लोगों ने कहा कि जब से शालिनी मौर्य ग्राम प्रधान बनी है। जैसे गांव को किसी की नजर सी लग गई है। भाजपा ने सत्ता पाने से पहले खुद को भ्रष्टचार मुक्त शासन देने का वादा किया था। लेकिन धरातल पर मामला ठीक दिख रही पाया जा रहा है ।इतना ही नहीं देश के प्रधानमंत्री ने जब पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी तो ठीक उसके बाद उन्होंने ही ना खाऊंगा ना खाने दूंगा का शपथ संकल्प भी लिया था। लेकिन मामला कुछ और ही दिखाई दिया इसी भ्रष्टाचार के क्रम में प्रधानमंत्री की एक और अति महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में भी जमकर लूट घसोट मचाते हुए। भ्रष्टाचार उजागर होते दिखाई दे रहा है ।इसके अलावा देश की सबसे बड़ी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालय में भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आने लगे हैं ।

 

इस भ्रष्टाचार की कहानी में एक पन्ने जुड़ते हुए। कौशाम्बी जनपद स्थित ब्लॉक सरसावां विकासखंड क्षेत्र की बरुआ ग्राम पंचायत की कहानी वहां के बाशिंदों ने बयां किया है ।बताते चलें सुबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जिला जनपद में लूट घसोंट की रुकने का नाम नहीं ले रहा है ।तो सुबह के अन्य जनपदों का क्या आलम होगा यह तो हम और आप खुद ही कल्पना कर सकतें हैं ।बताते चलें कि सरसावा ब्लाक की बरुआ गांव मे ग्राम प्रधान के विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों में तरह-तरह के सवाल उठा रहें हैं। बताना जरूरी होगा कि बरुआ ग्राम प्रधान की दबंगई व मनमानी चरम सीमा पर है। जो कि अभी तक शौचालय में ही धांधली मिल रही थी लेकिन अब ग्रामीणों का कहना यह भी है ।की आवास में भी बहुत खामियां देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने शिकायती लहजे से बताया कि ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत अधिकारी की मिलीभगत के चलते आवास वितरण में गलत तरीके से चयन करते हुए। लाभ देने का काम किया है । उन्होंने स्पष्ट किया कि बरुआ गांव में जिसका पक्का घर बना है। और प्रधान का करीबी रहा है ।या पैसा आदि दिया है । उसको आवास दिया गया है ।

 

लेकिन जिन लोगों के पास सर छुपाने की अपनी स्थाई छत नहीं है। या जिन्होंने खपरैल और झोपड़ी बनाकर घर मे रहते हैं ।उनको अभी तक आवास नहीं मिला आगे ग्रामीणों ने बताया कि यह तो कुछ भी नहीं चर्चाएं तो यह भी है। कि कुछ लोगों को 2006/ 2007 में शौचालय मिला था ।जबकि 2017 /2018 में फिर उन्हीं लोगों को शौंचालय मिला लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं ।जो ना तो शौंचालय न हीं आवास मिला इन गरीबों का नेवाला छीन कर माला माल हो रहें हैं ग्राम प्रधान व सिंगरेटरी और इसकी न कोई जांच न कुछ इस बन्दर बांट के खेल मे जरुर‌ उच्च अधिकारी का हांथ ग्रामप्रधान के सर पर है।तभी तो कोई जांच नहीं होती जिक्र करें शौचालय के रुप में तो सिर्फ 3 बाई 4 की रूम तो बनी है लेकिन गड्ढे एक भी नहीं बनाए गए अब लोग सौंच के लिए बाहर नहीं जाएंगे तो कहां जाएंगे क्योंकि जब ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी शौंच मुक्त बनाएंगे तभी तो सौंच मुक्त होगा ग्रामीणों ने डीएम मनीष कुमार वर्मा का ध्यान आकृष्ट कराने की मांग की है।

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