फतेहपुर कांड : पीड़िता की बात झुठला प्रशासन जुटा लीलापोती में

[object Promise]

फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के हुसेनगंज थाना क्षेत्र में शनिवार को एक लड़की को कथित रूप से दुष्कर्म के बाद जिंदा जलाने की कोशिश के मामले में प्रशासन पीड़िता की बात को नजरअंदाज करते हुए लीलापोती में जुट गया है। पीड़ित लड़की जहां दुष्कर्म के बाद जिंदा जलाने की कोशिश की बात खुलकर कह रही है, वहीं अधिकारी यह साबित करने में जुट गए हैं कि प्रेम प्रसंग में बंदिश लगाए जाने से क्षुब्ध होकर लड़की ने ‘आत्मदाह की कोशिश’ की।

दुष्कर्म पीड़िता 18 साल की दलित लड़की ने शनिवार को जिला अस्पताल में मीडिया को स्पष्ट तौर पर बताया था कि उसके पड़ोसी युवक मेवालाल ने दुष्कर्म करने के बाद उस पर मिट्टीतेल छिड़क कर आग दी। मगर प्रशासन के अधिकारी आरोपी को बचाने के लिए नई कहानी गढ़ने में जुट गए हैं।

पीड़िता के पिता का कहना है कि वह मजदूरी करने गया था और परिवार के अन्य सदस्य भी काम पर चले गए थे। उनकी बेटी घर में अकेली थी, उसी दौरान पड़ोस के युवक ने इस वारदात को अंजाम दिया। उनका आरोप है कि पुलिस उन्हें अपनी बेटी से मिलने तक नहीं दिया।

वहीं, फतेहपुर पुलिस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक मीडिया बाइट पर गौर करें तो जिलाधिकारी संजीव सिंह कहते हैं कि “शनिवार सुबह प्रेम प्रसंग को लेकर दोनों पक्षों की पंचायत में लड़की और लड़का दोनों मौजूद थे। पंचायत में तय हुआ था कि लड़की की शादी दूसरी जगह होने तक लड़का गांव से बाहर रहेगा और दोनों एक-दूसरे से बात नहीं करेंगे। इसी बीच लड़की पंचायत से उठकर अपने घर जाती है और खुद को आग लगा लेती है। घर में धुंआ उठता देखकर पंचायत में मौजूद ग्रामीण किसी तरह आग बुझाते हैं।”

प्रयागराज के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सुजीत पांडेय भी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के हवाले से मीडिया को लगभग यही कहानी बताते हैं। वह कहते हैं कि “लड़की और लड़का के घर सटे हैं। दोनों के घर से महज कुछ दूरी पर पंचायत हो रही थी, जिसमें दोनों को दूर रहने की कसम दिलवाई गई थी। तहरीर के मुताबिक मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।”

गौरतलब है कि लड़की के पिता का कहना है कि वह सुबह की पंचायत में मौजूद नहीं थे। मजदूरी करने घर से बाहर चले गए थे और घर में सिर्फ लड़की थी। सवाल यह है कि पिता की गैर मौजूदगी में पंचायत कैसे हो गई।

सूत्र बताते हैं कि महिला थानाध्यक्ष नमिता सिंह ने अपने मोबाइल फोन पर पीड़िता का जो बयान रिकार्ड किया है, उसमें भी पीड़िता ने दुष्कर्म के बाद जलाए जाने की बात कही है। साथ ही नायब तहसीलदार को दिए कलमबंद बयान में भी उसने यही दोहराया है।

ट्विटर पर जारी अपने बयान में पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा ने दावा किया कि मुकदमा अपराध संख्या-306/19 (दुष्कर्म और हत्या की कोशिश) में नामजद आरोपी मेवालाल को गिरफ्तार कर लिया गया है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्यवाही की जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पंचायत में दोनों (लड़की-लड़का) को अलग रहने का फरमान सुनाया गया और एक-दूसरे से बात न करने की कसम दिलवाई गई, जिससे क्षुब्ध होकर लड़की ने आत्मदाह की कोशिश की है तो जाहिर है कि प्रेम प्रसंग में लड़की उस लड़के से अलग नहीं रहना चाहेगी और ऐसी स्थिति में लड़की लड़के के खिलाफ बयान क्यों देगी, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही।

यदि पुलिस की जांच और कहानी पर भरोसा करें तब पंचायत में शामिल सभी ‘पंच’ लड़की को आत्मदाह के लिए बाध्य करने के दोषी हैं। उन पर कानूनी शिकंजा कसा जाना चाहिए। पुलिस ऐसा करेगी क्या?

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *