प्रभु और माता का विवाह भी जनकल्याण का यह हिस्सा था – दीदी स्मिता

उपेन्द्र कुशवाहा

 प्रभु के विवाहत्सव में खूब झूमे और जयघोष किये श्रोता

पडरौना,कुशीनगर। ऋषियों एवं यज्ञ के लिए प्रभु राम का राजमहल से निकलना तो मात्र एक बहाना था, जिसकी संरचना ब्रह्मा जी ने पहले की कर दी थी।

क्षेत्र के गांव बसडीला महन्थ में आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन श्री अयोध्या धाम से पधारी कथा मर्मज्ञ दीदी स्मिता वत्स ने कथा को आगे बढ़ते हुए। प्रभु श्रीराम संग श्री लक्ष्मण जी के राजमहल से मुनि संग निकलने, राक्षसों को मारकर ऋषिगण एवं यज्ञ की रक्षा करने, मुनि के साथ जनकधाम कि यात्रा, पुष्प वाटिका का भ्रमण, माता जानकी, सखियों के वार्तालाप का सुंदर वर्णन कर श्रोताओं को मनमुग्ध करती रही।

कथा प्रसंग में के दौरान धनुष यज्ञ, श्री परशुराम एवं श्री लक्ष्मण जी के संवाद के उपरांत माता जानकी और प्रभु श्रीराम के विवाह के दौरान श्रोता जहाँ कथा पंडाल में जोश और उत्साह के साथ नृत्य एवं प्रभु के नाम का जयघोष करने लगे, वही जनक नन्दनी के जनकपुर से विदाई की कथा सुन धर्म प्रेमी भावुक भी हुए। दीदी स्मिता वत्स ने कहा कि  सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति में राम-सीता आदर्श दम्पत्ति माने गए हैं। जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने सदा मर्यादा पालन करके पुरुषोत्तम का पद पाया, उसी तरह माता सीता ने सारे संसार के समक्ष पतिव्रता स्त्री होने का सर्वोपरि उदाहरण प्रस्तुत किया। इस पावन दिन सभी को राम-सीता की आराधना करते हुए अपने सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए प्रभु से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

कथा का शुभारम्भ पूर्व प्रधान हरिहर मद्देशिया ने मानस पूजन एवं आरती कर किया। इस दौरान जहां संगीत मंडली ने राधेश्याम यादव के नेतृत्व में सुन्दर भजन से लोगों के मन को मोहित कर रहे थे, वही आयोजन समिति के कार्यकर्ता हर कथा प्रेमी श्रोताओं के सुविधा का ध्यान रखने का प्रयास करते रहे।

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