लखनऊ। उत्तर प्रदेश का मौसम बदला-बदला है। आगामी पांच मई के मौसम को लेकर विशेष सतर्कता के निर्देश हैं। कई दिनों से पूर्वा दिशा से तेज हवा चल रही है। पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ और कम दबाव क्षेत्र बना था जो आंधी पानी बनकर आसमान से बरस पड़ा। इसी वजह से बादल भी छाये हैं। तापमान भी सामान्य से काफी नीचे है। चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे के मौसम विभाग ने गोरखपुर, बलिया, गाजीपुर, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्दार्थनगर, गोंडा, बदायूं, बलरामपुर, एटा, सीतापुर पीलीभीत, रामपुर, बरेली, मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़,मुजफ्फरनगर, बिजनौर और बागपत में आंधी-पानी और तूफानी हवाओं के लिए सतर्क किया है।
अवध के आसमान में गुरुवार को आसमान में कुदरत का खूबसूरत नजारा दिखा। यह नजारा खुली आंखों से लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, उन्नाव और आसपास के इलाकों में देखा गया। सूर्य के चारोओर गोल घेरा नजर आया। इस घेरे में सूर्य बेहद खूबसूरत दिखा। सुबह से दोपहर तक सूर्य के चारो ओर घेरा सा बना रहा। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक यह कोई चिंता की बात नहीं है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी बता रही है कि आसपास तूफान के बाद भी अवध क्षेत्र सुरक्षित है। बादल व धूल के कणों की वजह से इस प्रकार का प्रतिबंब बना। सूर्य की किरणों ने बादलों से परावर्तित होकर प्रतिबिंब बनाया।
इसी वजह से सूर्य के चारो ओर घेरा नजर आया, हालांकि जैसे-जैसे बादल कम हुए, वैसे-वैसे घेरा भी खत्म होता गया। शाम चार बजे यह घेरा पूरी तरह समाप्त हो गया। कहावतों में ढले मौसम विज्ञान के मुताबिक जब बारिश के दिनों में चंद्रमा के किनारे घेरा होता है तो नजदीक वाले वाले घेरे से पानी की उम्मीद नहीं होती लेकिन यदि घेरा दूर से बना होता है तो बारिश काफी तेज होती है। इसे पुरनिया लोगों ने दूरि गोंडा नेरे पानी, नेरे गोंडा दूरि पानी। की कहावत के रूप में ढाल रखा है। ऐसे ही लोगों ने बताया कि इस तरह की कोई कहावत सूरज को लेकर नहीं बनी। यह सब कुदरत की अपनी महिमा है।
गुरुवार को दिन भर तेज हवा लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी रही। वहीं दूसरी ओर गुरुवार को सुबह से बादल छाये रहे और धूप भी फीकी रही, जबकि पूर्वाह्न से ही सूर्य के चारो ओर घेरा नजर आया। इस पर सबसे पहले सोहावल के लोगों की नजर पड़ी। कई लोगों ने इसकी फोटो इसकी फोटो भी ली। हालांकि हवा का रुख बदला होने से नमी बनी है। लगातार उत्तरी-पूर्वी दिशा से हवा चलने की वजह से तापमान में खासी कमी आ गई है। नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता प्रो. पद्माकर त्रिपाठी का कहना है कि किरणों के बादलों से परावर्तन की वजह से ऐसा प्रतिबिंब बना। फैजाबाद स्थित राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. जसवंत सिंह का कहना है कि बादल और धूल के कणों की वजह से आसमान में ऐसा नजारा दिखा।
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