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कौशाम्बी । गो-तस्करी का कौशाम्बी हब बन चुका है। चंदौली से लेकर उन्नाव तक गोवंश लादकर जाने वाले वाहनों से यहां के तस्कर हर माह करोड़ो की वसूली करते थे। इसमें पप्पू व उबैद की अहम भूमिका थी। पप्पू व उसके साथियों के एसटीएफ दबोच चुकी है। पूछताछ में तस्करों ने सिपाही व दरोगाओं का नाम खोला है। सिपाही व दरोगा तस्करों के लिए रुपया वसूलवाते थे। इसके अलावा गोवंश लदे ट्रकों को बड़ी आसानी से पार कराते थे। गो-तस्करी में जिले के तस्करों ने गहरी पैठ बना ली थी। चंदौली से लेकर उन्नाव जनपद के थानों में तैनात सिपाही व दरोगाओं का इनका मजबूत नेटवर्क था। इन्हीं की मदद से तस्कर गोवंश की तस्करी करते थे। इस खेल में पप्पू व उबैद गिरोह की हनक थी। दोनों अपना-अपना क्षेत्र बांट रखा था।
हर माह दोनों मिलकर दो करोड़ रुपया की वसूली ट्रकों को पास कराने के नाम पर वसूलते थे। इसी रकम में से दरोगा व सिपाहियों को रुपया मिलता था। गो-तस्करी के नेटवर्क में शामिल दरोगा व सिपाही थानेदारों के बहुत करीबी होते थे। ये अधिकारी की गतिविधि बताकर गोवंश से लदे वाहनों को पास कराते थे। यदि कोई समाजसेवक अथवा जागरूक व्यक्ति राह में रोड़ा बनता था तो उसे तमाम तरीके से पुलिस कर्मी ही परेशान करते थे। इसके बाद भी बात बनने पर गो-तस्कर आपराधिक हथकंडा अपनाते थे।
हाल ही में एसटीएफ ने धूमनगंज (प्रयागराज) में दबिश देकर पप्पू व उसके साथियों को उठा लिया था। पूछताछ में पप्पू ने ही इस पूरे खेल से पर्दा उठाया तो महकमे के उच्चाधिकारियों की आंख खुल गई। उच्चाधिकारियों ने इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच कराई तो कौशाम्बी में तैनात दरोगा अभिलाष तिवारी, सिपाही अखिलेश सिंह, आरक्षी चालक हरेंद्र मिश्र और आरक्षी चालक विनोद यादव का नाम सामने आया। इनको एसपी ने निलंबित कर इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करा दी है।
संगठनों के लिए फंडिंग की है आशंका
गो-तस्करी के जरिए कमाई गई रकम में से प्रतिबंधित संगठनों को फंडिंग होने की भी आशंका है। इसकी भी गोपनीय जांच करवाई जा रही है। पकडे़ गए तस्करों का प्रतिबंधित संगठनों से लिंक खंगाला जा रहा है। इसके अलावा एसटीएफ की जांच में जो नए नाम गो-तस्करों के सामने आए हैं, उनकी भी गतिविधियां खंगाली जा रही है। पुलिस विभाग ने इन पर एकदम से शिकंजा कस दिया है। पुलिस अफसरों को आशंका है कि गो-तस्करों की अवैध कमाई का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
साइकिल से चलने वाले पास दर्जनों लग्जरी गाड़ियां
एसटीएफ के हत्थे चढ़ा एक तस्कर ऐसा है, जिसके पास 12 साल पहले तक चलने के लिए खुद की साइकिल नहीं थी। पंरपरागत उसका पेशा राजगीर का था। पिता व दादा यही करते आ रहे थे। अचानक 12 साल के भीतर इस तस्कर के पास दर्जनों लग्जरी गाड़ियां आ गईं। इतना ही नहीं लखनऊ, कानपुर के अलावा दिल्ली में उसके पास कई फ्लैट हैं। करेली में इस तस्कर का ठिकाना है।
दरोगा व सिपाहियों की संपत्ति की होगी जांच
गो-तस्करों के मददगार दरोगा अभिलाष तिवारी, सिपाही अखिलेश सिंह, हरेंद्र सिंह और विनोद यादव की संपत्ति की भी होगी जांच। पुलिस अधिकारियों ने इसकी भी कार्रवाई शुरू कर दी है। गो-तस्करों के मददगार इन पुलिस कर्मियों के पास जमीन कितनी है, कहां-कहां संपत्ति बना रखी है। इसका एक-एक जानकारी जुटाई जाएगी। इसके अलावा इनके परिजनों की भी संपत्ति पर पुलिस की निगाह है।
सपा सरकार में सिपाही कराता थानेदार का तबादला
सिपाही अखिलेश सिंह इलाहाबाद जोन का चर्चित सिपाही है। सपा सरकार में इस सिपाही की हनक इतनी थी कि वह थाने को अपने हिसाब से चलाता था और थानेदार को उसके हिसाब से चलना होता था। एसपी व एएसपी से मिलने के लिए वह उनके बंगले व दफ्तर में बिना वदी जाता था। बेरोकटोक वह सीधे कार्यालय में घुसता था। दुस्साहस इतना था कि वह पुलिस अफसरों से हाथ भी मिलाता था। कोखराज में इस सिपाही ने लंबा समय बिताया। सपा सरकार में इस सिपाही के कोपभाजन का शिकार भी कई थानेदार हुए, लेकिन इस सिपाही का कुछ नहीं बिगड़ा। इसका सबसे ज्यादा सुर्खियों में नाम पत्थर लदे वाहनों की निकासी कराने में आया था। कोखराज में स्थितियां बदलीं तो यह पूरामुफ्ती थाने चला गया था।
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