निर्मल मन जन सो मोहि पावा:आचार्य सुरेन्द शास्त्री

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रिपोर्टर – सैय्यद मकसुदुल हसन
मुसाफिरखाना-अमेठी । निर्मल मन जन सो मोहि पावा,मोहि कपट छल छिद्र न पावा,जो ब्यक्ति निर्मल मन से ईस्वर को भजता है वही भगवान को प्राप्त करता है और जो ब्यक्ति कपट छल से भगवान को प्राप्ति करने का प्रयास करता है वह भस्म हो जाता है, इसलिये पहले मन शुद्ध होना चाहिये क्योंकि मन ही मूषलाधार है l

यह बातें दादरा के अमर बहादुर महाविद्यालय में चल रही संगीत मई श्रीमद भागवत कथा के पांचवे दिवस अयोध्या धाम से पधारे कथावाचक आचार्य सुरेंद्र शास्त्री जी ने श्राद्धलुओ को कथा का रस पान कराते हुए कही।कथा ब्यास ने  कन्हैया राधा से संबंधित मक्खन चोर ,ग्वाल व कान्हा रस लीला आदि कथा का रस पान कराया।
वही मुख्य यजमान दुर्गा बख्श सिंह ने सपरिवार ब्यास पीठ की आरती उतारी। कथा आयोजक प्रमुख प्रतिनिधि दिनेश सिंह पप्पू ने आये हुये भक्तगणों का आभार प्रगट किया।कथा स्थल पर प्रसाद बितरण का कार्यक्रम भी चलता रहा।इस मौके पर प्रमुख नीतू सिंह,मोहित गुप्ता,आनंद ,प्रशांत श्रीवास्तव, हर्ष यादव,रविन्द्र तिवारी,राकेश तिवारी,हनुमंत सिंह,हनुमान जायसवाल,आदि उपस्थित रहे।

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