नही थम रहा वनो का अवैध कटान, काटे जा रहे फलदार एवं प्रतिबन्धित प्रजाति के वृक्ष

अनिल कोबरा
लखीमपुर खीरी । जुलाई अगस्त के महीनों में जब वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी पौधा रोपण करने में जुटे रहते है और वृक्षों के कटान के परमिट भी जारी नहीं किये जाते है, फिर भी वन माफिया क्षेत्रीय पुलिस एवं वन विभाग के कमर््िायों की सांठ-गांठ करके अवैध रूप से वनों की अवैध कटान करने में पूर्ण से सक्रिय है। वन माफिया रात के समय वनों का कटान करके सुबह तक काटी गयी लकड़ी उठान करवाकर उसे लकड़ी मण्डी स्थित आढ़तो पर बिक्रकी हेतु पहुँचा देते है, प्रभागीय वन अधिकारी को इस अवैध कटान की जानकारी समाचार पत्रों अथवा पत्रकारों द्वारा मिलने के बावजूद भी कोई ठोस कार्यवाही न करने से वनमाफियाअें के हौसले बुलनद है। उत्तर खीरी वन प्रभाग के निघासन मझगई, सिंगाही, धौरहरा, वन क्षघ्ेत्रों में अवैध कटान का कार्य अपने चरम पर है। इसकी जानकारी जब नवागत वन प्रभागीय वनाधिकारी डा0 अनिल कुमार पटेल दी गयी तो उनका जवाब बड़ा ही गैरजिम्मेदाराना लगा। डा0 पटेल से जब अवैध कटान पर बात की गयी तो उन्होनें कहा कि जब मुझे अवैध कटान की सूचना मिलती है तो उस पर तत्काल प्रभावी कार्यवाही की जाती है इस पर जब प्रश्नकर्ता पत्रकार ने उनसे पूछा कि आपको अवैध कटान की जानकारी क्या अवैध कटान वाला देता है, इस पर श्री डा0 पटेल ने कहा कि चोर क्यों सूचित करेगा कि वह चोरी करने जा रहा है? आप लोगों के माध्यम से ही अवैध कटान की जानकारी मिलती रहती है जिस पर प्रभावी कार्यवाही की जाती है। डा0 पटेल से जब उक्त पत्रकार ने यह जानना चाहा कि वन विभाग का सबसे छोटा कर्मचारी वाचर क्या आपको कभी अवैध कटान की जानकारी नहीं देता हे डा0 पटेल ने अपनी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की पत्रकार द्वारा यह पछे जाने पर आपके अधीन वन क्षेत्रों के प्रभारी, वन क्षेत्राधिकारी दो पेड़ों के कटान का परमिट बनाते है परन्तु वन माफिया दो पेड़ों की आंड़ में बीस पेड़ काट डालते है। अवैध रूप से काटे गये अतिरिक्त 18 पेड़ों का अवैध पैसा वन माफिया कटान करने से पूर्व ही वनक्षेत्राधिकारी को पहुँचा दिया जाता है, फिर भी यदि किसी माध्यम से अवैध कटान की सूचना जिलाधिकारी से होते हुए आप तक पहुँची है या सीधे आपकों दी जाती है तो आप अवैध रूप से काटी गयी लकड़ी का जुर्माना वसूल कर लकड़ी को वनमाफिया के हवाले कर देते है इस प्रकार वन माफिया यह सोच कर कि अदा किया गया जुर्माना किसी अन्य अधिकारी की जेब में जा रहा है, अतिरिक्त व्यय से हुए जुर्माने का भार वहन कर लेता है। क्या ऐसा कोई प्रावधान है कि अवैध रूप से काटी की गयी लकड़ी के साथ पकड़े गये कटान करने वालों, कटान करवाने वाले ठेकेदारों तथ अवैध कटान की लकड़ी खरीदने वाले आढ़तियों के विरूद्ध एक सख्त कानून बनाया जायें जायें जिससे अवैध कटान करने से पहले वनमाफिया सौ बार सोचे कि क्या वह अवैध कटान करने में फसने के बाद आने वाले संकट से बचाव कर पायेगा। इस पर डा0 पटेल बोले कि प्रावधान अथवा नियम कानून सरकार एवं साधन द्वारा बनायं जाते है जिन्हे हम लागू भर कर सकते है। डा0 पटेल से जब यह पूछा गया कि कटान परमिट जारी करने पूर्व कटान करवाने अथवा करने वाले व्यक्ति को उतनी ही नर्ह पौध का पोधारोपण करवाने का प्रावधान तो है जिसकी सिक्योरिटी भी जमा की जाती है क्या आप यह बता सकते है कि बीते वित्तीत्य वर्ष सहित वर्तमान वित्तीत्य वर्ष में कटान के लिये जारी किये गये पेड़ो की संख्या कितनी है? तथा उक्त काटे गये पेड़ों के स्थान पर कितनी नयी पौध लगायी गयी है और लगायी गयी उक्त पौध में से कितनी पौध जीवित है? इस प्रश्न के उत्तर में भी प्रभागीय वनाधिकारी ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि ये आंकड़े तुरन्त नहं बतायें जा सकते और अभी मुझे एक सप्ताह भी जनपद खीरी में आयें नहीं हुआ है। इस पर पत्रकार ने यह कहकर उक्त प्रभागीय वनाधिकारी पर एक प्रश्न और डाल दिया कि आप यह कहकर इससे मुक्ति नहीं पा सकते है क्योकि आप उत्तरी खीरी प्रभागीय वन क्षेत्र के शीर्षस्त अधिकारी है जिस प्रकार जिलाधिकारी यह कहकर आना बचान नहीं कर सकते कि अभी उन्हें चार दिन पहले जिले का चार्ज मिला हे अतः दहशत गर्भ नेपाल सीमा को पार कर भारत किस तरह आ गये तथा भारत नेपाल सीमा पर होने वाली तस्करी कौन क्यो और कैसे कर रहा है?

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उत्तरी खीरी प्रभागीय वनाधिकारी खीरी को यह जानकारी देते हुए बताया कि निघासन धौरहरा वन क्षेत्र में प्लाईवुड बनाने के सर्वाधिक कारखाने है। प्लाई बनाने के लिये मुख्य रूप् से दो प्रजातियों के वृक्षों के विनियर प्रयुक्त किये जाने की अनुमति है फिर भी यूक्लिप्टस, पापुलर के अतिरिक्त सेमल एवं फलदार वृक्ष जामुन के विनियर किस आधार पर किया जाता है? इस पर सहमति व्यक्त करते हुए उक्त प्रभागीय वनाधिकारी डा0 पटेल ने स्वीकार किया कि वैसे तो प्लाईवुड कारखानों में पापुलर एवं यूक्लिप्टस के वृक्षों विनियर प्रयुक्त किये जाने चाहिए परन्तु सेमल तथा जामुन के वृक्षों विनियर का भी प्रयोग प्लाईवुड बनाने में किया जा रहा है इसकी जानकारी मुझे मिली है जिसके चलते निघासन तथा धौरहरा के प्लाईवुड कारखानों पर छापे मारी की गयी जिससे उक्त कारखानों में फिलहाल प्लाईवुड निर्माणकार बन्द है। प्रभागीय वनाधिकारी उत्तरी खीरी को उक्त पत्रकार द्वारा यह जानकारी भी दी गयी कि धौरहरा वन क्षेत्र के ग्राम मूसेपुर में अवैध रूप से काटी गयी सेमल के वृक्षों का अवैध रूप से भण्डारन किया जाता है जो क्षेत्रीय पुलिस सहित क्षेत्रीय वनाधिकारी के संज्ञान में रहता है। अवैध रूप से, प्रतिबन्धित प्रजाति की सेमल की लकड़ी यहाँ एकत्र करके रात के अंधेरे में प्लाईवुड कारखानों में पहुँचा दी जाती है यदि आप उक्त बताये गये स्थान के साथ निघासन एवं धौरहरा सहित मझगी स्थित प्लाईवुड छापेमारी करे तो वहाँ पर भारी मात्रा में सेमल एवं जामुन के वृक्षो के बोटे पाये जायेगें।

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