जांच के दौरान अधिकारियों के घन घनाते रहे फोन
रिपोर्टर – संदीप कुमार
फतेहपुर जनपद के औद्योगिक क्षेत्र औंग थाना क्षेत्र के त्रिवेणी नमक फैक्ट्री में सोमवार को धमाके के साथ आग लग जाने से पूरे जनपद में हड़कंप मच गया था जहां दूसरे दिन उप जिला अधिकारी सुशील कुमार गौड़ की अगुवाई में पहुंचे आधा दर्जन से अधिक विभागों के आला अधिकारियों ने फैक्ट्री में पहुंचकर की जांच पड़ताल वफा से संबंधित सभी दस्तावेज खंगालते रहे उप जिला अधिकारी बिंदकी ने बताया कि 2 दिन बाद सभी विभागों के रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी जिसके बाद किसी भी प्रकार की विधिक कार्रवाई की जा सकती है ।
वहीँ पूरे मामले से इतर क्षेत्रीय लोगों में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा जहां लोगों का कहना है कि अभी तक जिला प्रशासन की ओर से गंभीर रूप से घायल कर्मचारियों की संख्या के साथ फैक्ट्री में काम करने वाले सभी कर्मचारियों के नाम, जिला, व प्रदेश, का जिला प्रशासन के द्वारा स्पष्ट ना होना चर्चित रहा तो वहीं दूसरी ओर गंभीर रूप से घायल 6 कर्मचारियों की हालत चिंताजनक बनी हुई है जिनका कानपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है ।
प्रथम दृष्टया जांच पर पूछे जाने पर जांच दल के अधिकारी गोलमोल जवाब देकर बचने का प्रयास करते रहे लोगों का कहना है की औद्योगिक जगत से जुड़े 3 बड़ी कंपनियों में छापेमारी के बाद भी किसी भी प्रकार की कोई जानकारी सार्वजनिक ना करना किसी बड़े खेल की ओर इशारा कर रही है छिवली नदी से सटी लक्ष्मी कॉटन मील हो या केमिकल फैक्ट्री के खिलाफ किया गया किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन सभी मामलों में जिला प्रशासन के द्वारा अभी तक कोई सार्वजनिक जानकारी स्थानीय लोगों को ना देना दुख की बात है ।
वही बंद कमरे के अंदर लगभग डेढ़ घंटे तक फैक्ट्री प्रबंध तंत्र व जांच टीम के अधिकारियों के बीच गुफ्तगू मैं ही सिमटता रहा मामला वहीं मैनेज होने की चर्चा जोरो से होती रही जो क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा । मजदूरों का इलाज कहां हो रहा है फैक्ट्री की एनओसी के बारे में भी जांच का हवाला देकर अधिकारियों ने गोलमोल जवाब देते हुए कैमरे की नजर से बचने का प्रयास करते रहे ।
समाज सेवी राकेश यादव ने कहा कि कर्मचारी चाहे जिस प्रदेश के हो कर्मचारियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा गंभीर रूप से घायल हुए कर्मचारियों को हाथी प्रबंध तंत्र की ओर से बेहतर इलाज के साथ आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए जिससे कर्मचारियों के परिवार का भरण पोषण चलता रहे यदि कर्मचारियों के साथ किसी तरह का उच्च अधिकारियों के द्वारा शोषण व मामले की लीपापोती कर नजर अंदाज किया गया तो फैक्ट्री को स्थानीय कर्मचारियों के विरोध का समना करना पड़ेगा वहीं अभी तक फैक्ट्री प्रबंधन के द्वारा कोई भी जानकारी सार्वजनिक ना करना बड़े ही दुख की बात है ।
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