स्वामी दयाराम दास आजकल यहां के गैहनवा आश्रम में पंचाग्नि यज्ञ कर रहे हैं। उनका यह तप अभी कई माह चलेगा। वे कहते हैं कि सांसारिक मोहमाया पूरी तरह से त्याग देनी है तो यह यज्ञ जरूरी है। उन्होंने बताया कि यह पंचाग्नि तपचार मास तक करने का विधान है। यह तप सूर्योदय से सूर्यास्त तक किसी भी समय किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वासनाओं के शमन के लिए इस महा हठ योग को किया जाता है। लगातार 18 साल तक यह योग करने के बाद साधक वासना से मुक्त हो जाता है। उनका 14 साल पूरा हो गया है। आखिरी तीन साल में इसके अलावा सिर पर हांडी में अग्नि रख कर तप किया जाता है।
इस दौरान अपने ईष्टदेव का जप किया जाता है। इस तप के बाद जेठ दशहरा को समापन के समय 501 कन्याओं को भोजन कराया जाएगा। उनका पूजन करके दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जायेगा। स्वामी दयाराम दास सुभागपुर के रामकिशोर तिवारी के पुत्र हैं।
इनका नाम पहले देश दीपक तिवारी था। इन्होंने कम्प्यूटर सांइस से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की है। पढ़ाई के दौरान अयोध्या में जानकी निवास के निमिया बाबा के सान्निध्य में दीक्षा ग्रहण कर संन्यास धर्म ग्रहण कर लिया। इस समय गैनहवा आश्रम में यज्ञ व तप कर रहे हैं।
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