रिपोर्ट:हर्ष यादव
मुसाफिरखाना(अमेठी)।।दादरा स्थित हिंगलाज मंदिर में नवरात्र में श्रद्धालुओं का तांता लगा है।मंदिर के दरबार में जलार्जन करने क लिए अपने घरों व दूरस्थ ग्रामों से नंगे पैर निकल जाते हैं। मंदिरों में नवरात्रि पर्व को लेकर खासी भीड़ उमड़ रही है। मां हिंगलाज देवी शक्ति पीठ पर प्रात: 4 बजे से महिला पुरूष, व बुजुर्ग सभी जलार्जन के लिये पहुंच जाते हैं।मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की सभी मुरादें हिंगलाज देवी पूरी करती हैं। भक्तों की आस्था का केंद्र बने इस प्राचीन मंदिर में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी तक माथा टेक चुके हैं।
दादरा स्थित हिंगलाज मंदिर का पौराणिक महत्व है। साल के बारहों मास मंदिर पर श्रद्वालु पहुंचते हैं। आसपास के जिले से लोग मन्नतों की पूर्ति के लिए देवी के दरबार में माथा टेकते हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी भी इस दरबार में माथा टेक चुके हैं। हिंगलाज मंदिर की स्थापना करीब 600 वर्ष पूर्व बाबा पुरुषोत्तम दास ने की थी। पुरुषोत्तम दास तुलसीदास के समकालीन थे।
बताते हैं कि तुलसीदास जी बाबा से मिलने के लिए दादरा में उनकी कुटिया में आते रहते थे। मंदिर के पुजारी पं शेषराम मिश्र के मुताबिक बाबा पुरुषोत्तम दास ने हिंगलाज नदी के किनारे हींगल पर्वत (अब पाकिस्तान में) पर 12 वर्षों तक कठोर तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया था। बाबा ने क्षेत्र के सुख शांति के लिए देवी से दादरा चलने की प्रार्थना की थी।
बाबा की प्रार्थना पर देवी ने प्रतीक स्वरूप उन्हें एक त्रिशूल दिया जो आज भी मंदिर में स्थापित है। मंदिर परिसर में सोमवार तथा शुक्रवार को मेला लगता है। दूर-दराज से आने वाले भक्त मंदिर के हवन कुंड में आहुति डालकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। नवरात्र में रात-दिन श्रद्धालु जमे रहते हैं। लोगों का मानना है नवरात्र के समय माता किसी न किसी रूप में मंदिर में साक्षात उपस्थित रहती हैं।
चढ़ता है हलवा पूड़ी का भोग
दादरा प्रधान प्रतिनिधि सर्वेश सिंह “रवि” व हिंगलाज सेवक अंजनी श्रीवास्तव ने बताया कि हिंगलाज मंदिर में नवरात्र व अन्य अवसरों पर महिलाएं देवी मां को हलवा-पूड़ी का भोग लगाती हैं। कड़ाही चढ़ाने का पूजन विधान यहां बहुत पुराना है। देवी मां को भोग लगाने के बाद भक्तों में प्रसाद वितरण किया जाता है।
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