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उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर : पिछले दिनो कुशीनगर जिले के दुदही में ट्रेन हादसे में स्कूली 13 बच्चों की मौत के बाद भी स्कूल प्रबंधन व जिला प्रशासन ने कोई सीख नहीं ली है। अभी भी कई स्कूल वैन चालक यातायात नियमों को ताक पर रख कर नौनिहालों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अभिभावकों का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं है। स्कूली बच्चे यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहनों में सवार होते हैं और रोजाना राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित प्रमुख चौराहों पर खड़ी यातयात पुलिस के सामने से ही गुजरते हैं, पर शायद ही कभी इनके खिलाफ नए शत्र के शुरुवात मे कोई सख्त कदम नही उठाया जा रहा है ।
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प्रमुख निजी स्कूलों में बच्चों के लिए बस की सुविधा भी है, पर बड़ी संख्या में ऐसे अभिभावक भी हैं, जो बच्चों को बसों में न भेज कर तीन पहिया वाहन टैंपो या स्कूल वैन में भेजते हैं। अब एक तीन पहिया टैंपो वाहन जिसमें नियमानुसार चार से छह सवारी आनी चाहिए, उसमें 15 से 20 बच्चे सवार होते हैं। तिपहिया चालक अपनी सीट के दोनों तरफ भी तीन से चार बच्चों को बैठा कर चलता है। यही नहीं वाहनों की हालत भी जर्जर होती है और इनमें कई वाहनों के तो चालक भी नाबालिग होते हैं।
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अभिभावक नहीं जागरूक
अपने नौनिहालों का बेहतर भविष्य बनाने के लिए स्कूल भेजने वाले अभिभावक भी जागरूक नहीं हैं। समाचार पत्रों में हादसों की बाबत खबरें पढ़ने और टीवी न्यूज चैनलों पर खबरें देखने के बाद एक पल के लिए तो उनके मुंह से आह जरूर निकलती है, पर उसके बाद यह भूल जाते हैं कि उनके अपने बच्चे भी असुरक्षित वाहनों से स्कूल जाते हैं और ऐसा उनके सामने होता है। वहीं स्कूल प्रबंधक यह कह कर अपना पीछा छुड़ा लेते हैं कि उनकी ओर से तो बस सेवा उपलब्ध है, पर अभिभावक ही बसों की बजाय तीन पहिया या स्कूल वैन से भेजना पसंद करते हैं। चूंकि बच्चे स्कूल के बाहर ही उतरते हैं, इसलिए उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं।
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हम ओवर लोड वाहनों के खिलाफ तो सख्त कदम उठाते ही हैं और प्राय: रोज चालान भी हो रहे हैं। स्कूली बच्चों को लाने ले जाने वाले वाहनों के चालकों को पिछले दिनों सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत जागरूक भी किया गया। अब फिर ऐसे वाहनों पर नजर रखी जाएगी और सख्ती वाले कदम उठाए जाएंगे। अभिभावक भी जागरूक हों।
-प्रम्हंस यादव , प्रभारी, यातायात पुलिस .कुशीनगर
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