रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन
मोहनगंज/अमेठी।।2 माह पूर्व अमेठी के एक परिवार ने लावारिस हालत में मिली सिर कटी लाश को अपनी बेटी मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था। मृतका के पिता ने अपने सगे भाई पर अपहरण व हत्या का केस दर्ज कराया था। लेकिन अब वह मृत बेटी जिंदा होकर घर लौट आई है। जिससे युवती के घर खुशी का माहौल है, लेकिन उसके चाचा की गृहस्थी उजड़ गई है। हत्या के आरोपों से चाचा की पुत्री के विवाह का रिश्ता टूट गया। पुलिस अब किशोरी व उसके परिवार पर कार्रवाई का मन बना रही है। शुरूआती जांच में सामने आया है कि, किशोरी एक युवक के साथ दिल्ली भाग गई थी, रंजिशन उसके पिता ने अपने सगे भाई को फंसा दिया।मोहनगंज थाना क्षेत्र के रमई गांव निवासी बृजलाल की बेटी पुष्पा करीब ढ़ाई माह पहले घर से अचानक लापता हो गई। इस मामले में बृजलाल ने अपने भाई दृगपाल व उसकी पत्नी सुनीता पर अपहरण का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। इसी बीच 29 मार्च को सवितापुर गांव के पास नहर में एक युवती की सिर कटी लाश मिली। जिसे बृजलाल ने अपनी बेटी के तौर पर शिनाख्त की और उसका अंतिम संस्कार किया।
लेकिन बीते मंगलवार 28 मई को अचानक पुष्पा घर लौट आई तो इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने युवती को अपनी अभिरक्षा में लिया है। वहीं, परिजनों ने उसे साथ रखने से इंकार कर दिया है। पिता बृजलाल ने कहा कि, विवाद में भाई ने मारपीट की थी। बेटी को जान से मारने की धमकी दी थी। ऐसे में जब बेटी गायब हुई तो उसे नामजद किया गया। लेकिन अब केस वापस ले लूंगा।
वहीं आरोपी चाचा दृगपाल का कहना है कि, वो लखनऊ में रहकर मजदूरी करते हैं। 18 मार्च को बेटी की शादी का रिश्ता तय किया था। अगले दिन पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह बात जब बेटी के ससुरालीजनों को पता चली तो उन लोगों ने रिश्ता तोड़ दिया। पुलिस ने तीन दिनों तक हिरासत में ले रखा था और जुर्म कबूल करवाने के लिए तमाम अत्याचार किए। लेकिन मैं निर्दोष था।
अमेठी एसपी बोले- अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया गया था केस एसपी राजेश कुमार ने बताया कि, इस प्रकरण में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जिसकी विवेचना चल रही है। जल्द ही इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाई जाएगी। वहीं, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वीर बहादुर सिंह ने कहा कि, बृजपाल ने कूटनीति के तहत अपने भाई को फंसाया था। जिस लड़की की लाश मिली थी, वह उसकी बेटी नहीं थी। जबकि पूरे गांव को उसकी बातों पर विश्वास नहीं था।
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