जीवन जब तक है, तब तक स्वस्थ व आनंद के साथ प्रभु का स्मरण करते रहे:विनय शास्त्री

जीवन जब तक है, तब तक स्वस्थ व आनंद के साथ प्रभु का स्मरण करते रहे:विनय शास्त्री

रिपोर्ट:हर्ष यादव

मुसाफिरखाना। रेलवे स्टेशन निकट एडवोकेट जयबख्श सिंह के निज आवास पर चल रहे साप्ताहिक भागवत ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस में वाराणसी से पधारे कथा व्यास विनय शास्त्री जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का रसपान कराया गया।
कथाब्यास ने कथा का श्रावण करते हुए कहा कि,दान करने वाला सदैव बड़ा होता है और लेने वाला छोटा. दान की महत्ता इसी से परिभाषित होती है. हमारे समाज में दान की परंपरा इसी कारण प्रभावी है.।शास्त्री जी ने बताया कि जब भक्त प्रहलाद से नृसिंह भगवान ने वरदान मांगने को कहा तो प्रहलाद ने कहा कि मैं व्यापारी नहीं अपितु आपका प्रेमी भक्त हूं।आप मेरी मांगने की कामना को ही समाप्त कर दे।

जीवन जब तक है, तब तक स्वस्थ व आनंद के साथ प्रभु का स्मरण करते रहे:विनय शास्त्रीउन्होंने आगे यह भी बताया कि हम सबको भगवान से एक ही प्रार्थना करते रहना है कि जीवन जब तक है, तब तक स्वस्थ व आनंद के साथ प्रभु का स्मरण करते रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चों को शिक्षा-ज्ञान तो मिलता है लेकिन संस्कार नही मिलता है।इस पर बच्चों को ध्यान आकर्षित कराने की आवश्यकता है।

जीवन जब तक है, तब तक स्वस्थ व आनंद के साथ प्रभु का स्मरण करते रहे:विनय शास्त्रीआयोजक एडवोकेट सुधाकर सिंह व प्रभाकर सिंह ने सपरिवार ब्यास पीठ की आरती उतारी।
कथा श्रावण में एसडीएम महात्मा सिंह,प्रमुख प्रतिनिधि दिनेश सिंह,सर्वेश सिंह “रवि”,मोहित गुप्ता,अशोक सिंह,पवन तिवारी,पवन यादव,सुंदरलाल त्रिपाठी,आदि रहे।

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