कहने को तो कौशाम्बी सूबे के उपमुख्यमंत्री का गृह जनपद है लेकिन जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसी है कि जनपद मे जीवन प्रत्याशा घटता जा रहा है। कभी स्वास्थ्य कर्मी तो कभी डॉक्टरों की लापरवाहियों के चलते कौशाम्बी मे मौत होना आम बात हो गई है। हाल के दिनों मे स्थिति ज़्यादा भयावह हो चली है। मच्छरों से फैलने वाली जानलेवा बीमारी डेंगू तेज़ी से पूरे जनपद मे फैल रहा है। डेंगू के चलते आठ लोगों की मौतों ने तथा अस्पतालों मे डेंगू के मरीज़ों की संख्या मे हुए इज़ाफ़े ने चिता बढ़ा दी है। लेकिन ज़िम्मेदारों ने अब तक चुप्पी साध रखी है और डेंगू से बचने के लिए अब तक कोई भी ठोस क़दम नही उठाए गए। शायद स्वास्थ्य विभाग को अभी और मौतों का इंतज़ार है।
खैर विभाग का यह लापरवाह रवैया हो भी क्यों नहीं, मौतों के बाद शासन का कोई न कोई मंत्री सामने आएगा और बोल देगा कि इतनी मौतें तो हर साल डेंगू के चलते होती हैं। जनपद के मुख्यालय समेत अन्य क्षेत्रों मे लोग डेंगू को लेकर सशंकित हैं वहीं विभाग तथा आला अधिकारी कुंभकर्णी नींद मे सो रहे हैं। शासन से लेकर जिले के अधिकारियों की मामले मे उदासीनता ने सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगा दिया है। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के समानान्तर ऐसी मौतों ने जनपद वासियों के मन मे डर पैदा कर रखा है। मच्छरों से फैलनी वाली यह बीमारी लोगों की शरीर मे प्लेटलेट्स को बहुत तेज़ी से हानि पहुँचती है और इसकी चपेट मे आए मरीज़ को त्वरित और सही इलाज न मिल पाने के कारण मौत हो जाती है।
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